नवीनतम लेख

कार्तिगाई दीपम उत्सव के शुभ मुहूर्त

तमिल संप्रदाय का प्रमुख त्योहार है कार्तिगाई दीपम उत्सव, जानें सहीं पूजा विधि और शुभ मुहूर्त 



दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला कार्तिगाई दीपम उत्सव एक महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार है, जो भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। यह उत्सव तमिल माह कार्तिगाई की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो इस साल 13 दिसंबर को पड़ रहा है। इस दिन लोग मिट्टी के दीये जलाकर भगवान कार्तिकेय के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। यह तीन दिवसीय त्योहार है। पहले दिन भरणी दीपम, दूसरे दिन अन्नामलाई दीपम और तीसरे दिन पंचरात्र दीपम मनाया जाता है। 

तिरुवन्नामलाई अरुणाचलेश्वर स्वामी मन्दिर का कार्तिगाई दीपम् उत्सव अत्यन्त प्रसिद्ध है। यह उत्सव कार्तिकाई ब्रह्मोत्सवम के नाम से अत्यधिक लोकप्रिय है। ऐसे में आइए जानते हैं दिसंबर माह में कार्तिगाई दीपम उत्सव कब मनाया जा रहा है, और इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है। 

कब है कार्तिगाई दीपम उत्सव 2024? 


कार्तिगाई दीपम उत्सवत तमिल माह कार्तिगाई की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। ऐसे में इस तिथि की शुरूआत 12 दिसंबर को शाम  06 बजकर 20 मिनट पर हो रही है जो 13 दिसंबर की शाम 04 बजकर 18 मिनट तक जारी रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कार्तिगाई दीपम उत्सव 13 दिसंबर को मनाया जाएगा। 

कार्तिगाई दीपम उत्सव 2024 शुभ मुहूर्त 


  1. ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:45 मिनट से 06:47 मिनट तक 
  2. अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:47 मिनट से दोपहर 12:21 मिनट तक 
  3. गोधूली मुहूर्त: शाम 04:14 मिनट से 04:45 मिनट तक 

कार्तिगाई दीपम पर्व कैसे मनाते है? 


कार्तिगाई दीपम पर्व एक महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार है, जो भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। इस पर्व को मनाने के लिए इन विधियों का पालन किया जाता है:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और घर की सफाई करना।
  • घरों को फूलों से सजाना और भगवान के स्वागत के लिए दीपक जलाना।
  • व्रत रखना और शाम को पूजा के बाद व्रत खोलना।
  • आंध्र प्रदेश में लोग नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने के लिए 365 बातियों वाला एक बड़ा दीपक जलाते हैं।
  • कार्तिक पुराण पढ़ना और भगवान कार्तिकेय की पूजा करना।



आजा माँ आजा माँ एक बार, मेरे घर आजा माँ (Aaja Maa Aaja Maa Ek Baar Mere Ghar Aaja Maa )

आजा माँ आजा माँ एक बार,
मेरे घर आजा माँ,

भोले ऐसी भांग पिला दे, जो तन मन में रम जाए (Bhole Aisi Bhang Pila De Jo Tan Man Me Ram Jaye)

शिव समान दाता नहीं,
है ये देवों के है देव,

माघ पूर्णिमा पूजा विधि

हिंदू धर्म में, पूर्णिमा तिथि को विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन जल और प्रकृति में एक अद्भुत ऊर्जा प्रवाहित होती है, जो मानव जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इस वर्ष माघ पूर्णिमा 2025 और भी विशेष बन गई है।

बसंत पंचमी पर महाकुंभ का स्नान क्यों है खास?

महाकुंभ जो कि दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है इस बार बसंत पंचमी पर विशेष रूप से खास होने वाला है। इस दिन महाकुंभ में तीसरा अमृत स्नान होना तय हुआ है जो कि त्रिवेणी संगम में होगा।