नवीनतम लेख

मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनती है

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी? जानिए इसका पौराणिक महत्व और कारण 


मकर संक्रांति का त्योहार आगामी 14 जनवरी को है। देश के कई हिस्सों में इसे खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। खिचड़ी के चावल से चंद्रमा और शुक्र की शांति संबंधित है। वहीं, काली दाल से शनि, राहू और केतु का संबंध है। जबकि, हल्दी से बृहस्पति और हरी सब्जियों से बुध का संबंध है। वहीं, जब खिचड़ी पकती है तो उसकी गर्माहट का संबंध मंगल और सूर्यदेव से है। तो आइए, इस आर्टिकल में और विस्तार से जानते हैं कि इस दिन खिचड़ी क्यों खाई जाती है। 


इस दिन खिचड़ी क्यों खाई जाती है? 


खिचड़ी कई तरह के पदार्थों का मिश्रण होता है। इसलिए, लगभग सभी ग्रहों का संबंध खिचड़ी से है। यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान करने का काफी महत्व है। 

वहीं, मकर संक्रांति इसलिए भी खास है क्योंकि,  महाभारत के समय भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपने प्राणों का त्याग किया था। और उसी दिन उनका श्राद्ध और तर्पण कर्म किया गया था। इसलिए भी इस दिन विशेषकर खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व माना गया है।  


क्या है खिचड़ी की पौराणिक कथा? 


खिचड़ी से जुड़ी बाबा गोरखनाथ की एक पौराणिक कथा है। दरअसल, खिलजी के आक्रमण के दौरान बाबा गोरखनाथ के शिष्य  खाना नहीं बना पाते थे और भूखे रहने की वजह से हर दिन के साथ कमजोर होते जा रहे थे। योगियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए बाबा ने अपने योगियों को चावल, दाल और सब्जियों को मिलाकर पकाने की सलाह दी। यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था। साथ ही इससे योगियों को काफी ऊर्जा भी मिलती थी। बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी से बने भोजन को खिचड़ी का नाम दिया। यही कारण है कि आज भी मकर संक्रांति के पर्व पर गोरखपुर में स्थित बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास खिचड़ी मेला आयोजित किया जाता है। इस दौरान बाबा गोरखनाथ जी को विशेषकर खिचड़ी को भोग लगाया जाता है। 


किन देवताओं को लगता है खिचड़ी का भोग?  भगवान सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान सूर्य को आत्मा का कारक भी बताया गया है। धर्म ग्रंथो के अनुसार, जो भी मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य को खिचड़ी का भोग लगाता है उसे उनकी कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही जातक की सेहत भी बढ़िया रहती है। वहीं, हिंदू धर्म ग्रंथों में शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है। उन्हें भी मकर संक्रांति पर खिचड़ी का भोग लगाने की प्रथा है। बता दें कि शनि देव को काली उड़द की दाल की खिचड़ी में काला तिल डालकर भोग लगाया जाता है। 


मकर संक्रांति पर दान करें खिचड़ी 


मकर संक्राति के पर्व पर किया गया दान अक्षय फलदायी होता है। कहीं-कहीं इस त्योहार को उत्तरायण भी कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्त्व है। पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में ये नई फसल काटने का समय होता है। इसलिए, किसान इस दिन को भगवान के प्रति अपना आभार प्रकट करने के दिन के रूप में मनाते हैं। इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है। इसके अलावा मकर संक्रांति पर कई स्थानों पर खिचड़ी भी बांटी जाती है।  


रामयुग: जय हनुमान - हर हर है हनुवीर का (Jai Hanuman From Ramyug)

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

नरसिंह द्वादशी 2025 तिथि और महत्व

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन नरसिंह द्वादशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन विष्णु जी के अवतार भगवान नरसिंह भगवान की पूजा करने की परंपरा है।

आज है आनंद बाबा नन्द के भवन में - भजन (Aaj Hai Anand Baba Nand Ke Bhawan Mein)

आज है आनंद बाबा नन्द के भवन में,
ऐसा ना आनंद छाया कभी त्रिभुवन में,

भोले के हाथों में, है भक्तो की डोर (Bhole Ke Hatho Mein Hai Bhakto Ki Dor)

भोले के हाथों में,
है भक्तो की डोर,