मन तड़पत हरि दर्शन को आज
मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज
नगर मे जोगी आया,
भेद कोई समझ ना पाया।
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥
धूम मचाने आ जइयो आई होली सावरिया,
होली सावरिया आई होली सावरिया,