नवीनतम लेख

मीन संक्रांति का महत्व

सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाती है मीन संक्रांति, जानिए इसका महत्व 


मान्यताओं के अनुसार जब भगवान सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो मीन संक्रांति मनाई जाती है। यह तिथि फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होती है। ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य सबसे शक्तिशाली होते हैं, मगर जब सूर्य भगवान मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो सूर्य की शक्तियां घट जाती हैं और साथ ही मीन राशि भी कमजोर हो जाती है। इसलिए इस समय कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है और यह अवधि 1 महीने तक चलती है। इस समय को खरमास और मलमास भी कहते हैं।

मीन संक्रांति पर न करें यह काम


खरमास महीने में कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, उन कार्यों के बारे में जानते हैं:

  • खरमास तिथि में शादी-विवाह नहीं होता है, क्योंकि यह तिथि शादी के लिए उचित नहीं मानी जाती है।
  • इस समय गृह भोज या गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए।
  • अगर इस समय आप मुंडन करने का सोच रहे हैं तो भी न करें क्योंकि यह समय उचित नहीं होता है।
  • इस समय न केवल विवाह बल्कि सगाई करना भी वर्जित होता है।

यह समय व्यापार के लिए अच्छा नहीं होता है


यह समय शुभ नहीं माना जाता है, इसलिए आपको किसी व्यवसाय में निवेश नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस समय कोई नया व्यवसाय भी शुरू न करें क्योंकि इससे आपको लाभ और समृद्धि नहीं मिलेगी। इसलिए किसी व्यवसाय को शुरू करने और उसमें निवेश करने से बचें, और खरमास महीने के बाद सही समय का इंतजार करें।

मीन संक्रांति पर करें ये काम


इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में या गंगाजल की कुछ बूंदें अपनी बाल्टी में मिलाकर स्नान करें। फिर भगवान सूर्य को पीतल के लोटे में जल अर्पित करें। इस दिन गरीब लोगों को अनाज, कपड़े, पैसे, चीनी, हल्दी का दान करें, जिससे आपके जीवन और परिवार में समृद्धि आएगी। इसके अलावा भगवान सूर्य का नाम जपते रहें, जिससे भगवान सूर्य का आशीर्वाद मिलता है और ग्रह दोष भी शांत होते हैं। साथ ही इससे आपके जीवन में खुशियां भी आती हैं। इस तरह से मीन संक्रांति मनाएं, आपके जीवन में समृद्धि और शांति आएगी।

अगहन को मार्गशीर्ष क्यों कहते हैं

मार्गशीर्ष मास धर्म, भक्ति और ज्योतिषीय महत्व से परिपूर्ण एक विशिष्ट मास माना जाता है। यह मास भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है और इसे अत्यंत शुभ भी माना जाता है।

होलाष्टक के यम-नियम क्या हैं

हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक होली से पहले आठ दिनों की एक विशेष अवधि है, जो फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक चलती है। इस अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है।

करें भगत हो आरती माई दोई बिरियां

सदा भवानी दाहनी।
सदा भवानी दाहनी, सम्मुख रहें गणेश।
पांच देव रक्षा करें,
ब्रह्मा, विष्णु, महेश।

दे दो अपनी पुजारन को वरदान माँ(Dedo Apni Pujarin Ko Vardan Maa)

दे दो अपनी पुजारन को वरदान माँ,
मैया जब तक जियु मैं सुहागन जियु,