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पौष माह में करें ये उपाय

Paush Month 2024: पौष माह में करें ये उपाय, पितृ होंगे प्रसन्न



हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह साल का दसवां महीना होता है जो मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। वैदिक पंचाग के अनुसार, इस साल पौष माह की शुरुआत 16 दिसंबर से हो चुकी है। पौष का महीना पितरों का ही महीना माना जाता है। पौष माह में पितरों के निमित्त दान बहुत शुभ और लाभकारी है। तो आइए इस आलेख में पौष माह के दौरान पितरों को प्रसन्न करने हेतु बताये गये कुछ सरल उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

पौष माह में पितरों को प्रसन्न करने के उपाय 


  1. पितरों का संबंध तिल से माना गया है। ऐसे में रोजाना सूर्य को तिल मिलाकर जल चढ़ाने से पितरों की नाराजगी दूर होती है और पितृ प्रसन्न होकर अपने परिजनों पर कृपा बरसाते हैं।
  2. पौष माह में तिल का दान करने से पितृ शांत होते हैं और पितरों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है। इसके अलावा, पितरों को पिशाच योनी से भी मुक्ति मिलती है।
  3. इस विशिष्ट मास में रविवार के दिन व्रत रखते हुए रोजाना पीपल के पेड़ की 11 परिक्रमा लगाने से पितृ दोष दूर होता है और पितृ अपनी कृपा परिजनों पर बरसाते हैं।
  4. पौष के महीने में घर की दक्षिण दिशा में रोजाना एक सरसों के तेल का दीया जलाने से पितृ दोष का दुष्प्रभाव कम होता जाता है और यह नकारात्मकता भी नष्ट करती है।
  5. इसके अलावा पौष माह में किसी भी जरूरतमंद को उड़द की दाल की खिचड़ी खिलाने से घर में पितरों का आशीर्वाद बना रहता है और पितृ द्वारा काम में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  6. भगवान विष्णु पितरों के देवता माने जाते हैं। ऐसे में पितरों को प्रसन करने के लिए रोजाना भगवान विष्णु के स्तोत्र का पाठ करना चाहिए या विष्णु चालीसा की पाठ करना चाहिए। 
  7. भगवान विष्णु को रोजाना एक चुटकी तिल चढ़ाते हुए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से पितरों को मोक्ष मिल जाता है और परिवार के लोगों को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। 
  8. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पौष माह में पितरों के निमित्त वस्त्रों का दान करने से घर में सुख-समृद्धि का वास स्थापित होता है और शुभता का घर में प्रवेश होता है।
विवाह पंचमी के शुभ संयोग

विवाह पंचमी का त्योहार भगवान राम और माता सीता के विवाह के पावन अवसर के रूप में मनाया जाता है। लोग इस दिन वैवाहिक जीवन में शांति के लिए भगवान राम और माता सीता की पूजा करते है।

मासिक शिवरात्रि पर जलाभिषेक

प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। ये दिन भगवान शिव को समर्पित होती है। इस दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है।

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विधि

श्रीकृष्ण पूजन हिन्दू धर्म की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें भक्ति और पवित्रता का संगम होता है। इसे विशेषकर जन्माष्टमी या किसी शुभ अवसर पर किया जाता है।

पौष अमावस्या कब है

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