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यशोदा माँ के होयो लाल, बधाई सारे भक्ता ने (Yasoda Ma Ke Hoyo Laal Badhai Saare Bhagta Ne)

यशोदा माँ के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने,

बधाई सारे भक्ता ने,

बाज्यो रे बाज्यो देखो थाल,

बधाई सारे भक्ता ने,

यशोदा मां के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने ॥


आज यो अँगणो धन्य हुयो है,

कृष्ण लला को जन्म हुयो है,

नाचो रे नाचो नौ नौ ताल,

बधाई सारे भक्ता ने,

यशोदा मां के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने ॥


खुशखबरी या सबने सुणावा,

झूमा रे नाचा मैं तो मौज मनावा,

गोपालो लियो अवतार,

बधाई सारे भक्ता ने,

यशोदा मां के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने ॥


महला में अंगणो अंगणा में पलणों,

पलणे में झूल रह्यो यशोदा को ललनो,

नजरा उतारा बारम्बार,

बधाई सारे भक्ता ने,

यशोदा मां के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने ॥


चालो जी चालो यशोदा माता के चाला,

बालक निरखस्या लुनराई वारा,

आवो सजावा पूजन थाल,

बधाई सारे भक्ता ने,

यशोदा मां के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने ॥


यशोदा माँ के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने,

बधाई सारे भक्ता ने,

बाज्यो रे बाज्यो देखो थाल,

बधाई सारे भक्ता ने,

यशोदा मां के होयो लाल,

बधाई सारे भक्ता ने ॥

मार्गशीर्ष शुक्ल की मोक्षदा एकादशी (Margshersh Sukal Ki Mouchda Ekadashi) )

इतनी कथा सुन महाराज युधिष्ठिर बोले- हे दशी जनार्दन आपको नमस्कार है। हे देवेश ! मनुष्यों के कल्याण के लिए मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का नाम एवं माहात्म्य वर्णन कर यह बतलाइये कि उसकीएकादशी माहात्म्य-भाषा विधि क्या है?

लाऊँ कहाँ से, भोलेनाथ तेरी भंगिया(Lau Kaha Se Bhole Nath Teri Bhangiya)

लाऊँ कहाँ से,
भोलेनाथ तेरी भंगिया,

जन्म उत्सव आपका हम,आज (Janam Utsav Aapka Hum Aaj)

जन्म उत्सव आपका हम, आज मनाएंगे,

शनि प्रदोष व्रत मुहूर्त और तारीख

सनातन हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। बता दें कि प्रदोष व्रत महीने में दो बार आता है। पर प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ने पर उसे शनि त्रयोदशी के नाम से जाना जाता है।

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