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ये उत्सव बजरंग बाले का, ये लाल लंगोटे वाले का (Ye Utsav Bajrang Bala Ka Ye Lal Langote Wale Ka)

ये उत्सव बजरंग बाले का,

ये लाल लंगोटे वाले का,

वाह रे बजरंगी क्या कहना,

ऐ राम भक्त तेरा क्या कहना ॥


वो लांघ समुन्दर पार गया,

रावण की लंका जार गया,

लंका को जलाना क्या कहना,

रावण को डराना क्या कहना ॥


संजीवन बूटी लाने को,

लक्ष्मण के प्राण बचाने को,

पर्वत को उठाना क्या कहना,

लक्ष्मण को जिलाना क्या कहना ॥


श्री राम प्रभु को प्यारा है,

अहिरावण को जा मारा है,

ये राम दीवाना क्या कहना,

कहता है जमाना क्या कहना ॥


ये उत्सव बजरंग बाले का,

ये लाल लंगोटे वाले का,

वाह रे बजरंगी क्या कहना,

ऐ राम भक्त तेरा क्या कहना ॥

होली और रंगों का अनोखा रिश्ता

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ये खुशियां, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और गिले-शिकवे भुलाकर त्योहार मनाते हैं। लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा है कि होली पर रंग लगाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है, जो भगवान श्रीकृष्ण और प्रह्लाद से जुड़ी है।

परमेश्वर स्तुति स्तोत्रम् (Parameshvar Stuti Stotram)

त्वमेकः शुद्धोऽसि त्वयि निगमबाह्या मलमयं

संसार के लोगों से आशा ना किया करना(Sansar Ke Logon Se Asha Na Kiya Karna)

संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई ना हो अपना,

नाम तेरा दुर्गे मैया हो गया(Naam Tera Durge Maiya Ho Gaya)

नाम तेरा दुर्गे मैया हो गया,
दुर्गुणों का नाश करते करते ॥