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सुनते सबकी पुकार जी: भजन (Sunte Sabki Pukar Hanuman Ji)

सुनते सबकी पुकार,

जो भी श्रद्धा और प्रेम से है,

आता इनके द्वार,

बोलो जयकार,

जय बजरंगी बोलो जी बोलो,

जय बजरंगी ॥


जिसने लिया संकल्प प्रभु के,

सब कष्टों को मिटाने का,

क्यों ना हम गुणगान करे,

श्री राम के उस दीवाने का,

तेरी शक्ति अपार,

तू तो लाया था अकेला,

सारा पर्वत उखाड़,

बोलो जयकार,

जय बजरंगी बोलो जी बोलो,

जय बजरंगी ॥


निशाचर हीन बनाकर धरती,

प्रभु का हाथ बटाया था,

रामचंद्र जी से प्यार था कितना,

सीना फाड़ दिखाया था,

है जब तक धरती आकाश,

ये दुनिया रखेगी याद,

तेरा उपकार,

बोलो जयकार,

जय बजरंगी बोलो जी बोलो,

जय बजरंगी ॥


चारो युग का हाल जो जाने,

अजर अमर कहलाए है,

भक्तो की रक्षा करने,

शिव रूप बदलकर आए है,

तेरी महिमा अपार,

तू ही ‘बबली’ की जीवन नैया,

करता बाबा पार,

बोलो जयकार,

जय बजरंगी बोलो जी बोलो,

जय बजरंगी ॥


सुनते सबकी पुकार,

जो भी श्रद्धा और प्रेम से है,

आता इनके द्वार,

बोलो जयकार,

जय बजरंगी बोलो जी बोलो,

जय बजरंगी ॥


म्हने हिचक्या आवे जी (Mhane Hichkiyan Aave Ji)

अरज लगावे जी,
सांवरिया थासु अरज लगावे जी,

कैसे दर आऊं, मैं तेरे दरश पाने को (Kaise Dar Aau Main Tere Darash Pane Ko)

कैसे दर आऊं,
मैं तेरे दरश पाने को,

राम लक्ष्मण के संग जानकी, जय बोलो हनुमान की (Ram Lakshman Ke Sang Janki)

राम लक्ष्मण के संग जानकी,
जय बोलो हनुमान की,

श्री महालक्ष्मी व्रत कथा

(यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आरम्भ करके आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समापन किया जाता है।)