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सुखी मेरा परिवार है, ये तेरा उपकार है: भजन (Sukhi Mera Parivar Hai Ye Tera Upakar Hai)

सुखी मेरा परिवार है,

ये तेरा उपकार है,

मेरे घर का एक एक पत्थर,

तेरा कर्जदार है ॥


देख गरीबी घबराए हम,

रहते थे परेशान जी,

किस्मत हमको लेके गई थी,

फिर मैया के धाम जी,

नजर पड़ी मेरी मैया की,

भरा पड़ा भंडार है,

मेरे घर का एक एक पत्थर,

तेरा कर्जदार है ॥


दबी पड़ी है झोपडी,

मैया के एहसान से,

भरी पड़ी है कुटिया मेरी,

बस माँ के सामान से,

जब भी माँगा मैया से,

किया नही इंकार है,

मेरे घर का एक एक पत्थर,

तेरा कर्जदार है ॥


जब जब संकट आता है,

माँ के आगे रोते है,

हम तो इसके भरोसे जी,

खुटी तान के सोते है,

हर पल करती रखवाली,

ये बनके पहरेदार है

मेरे घर का एक एक पत्थर,

तेरा कर्जदार है ॥


मैया जी का दिल देखा,

दिल की बड़ी दिलदार है,

इस परिवार को ये समझे,

खुद का ही परिवार है,

जान से ज्यादा ‘बनवारी’,

हमसे करती प्यार है,

मेरे घर का एक एक पत्थर,

तेरा कर्जदार है ॥


सुखी मेरा परिवार है,

ये तेरा उपकार है,

मेरे घर का एक एक पत्थर,

तेरा कर्जदार है ॥

हे गोविन्द हे गोपाल अब तो जीवन हारे(He Govind He Gopal Ab To Jeevan Hare)

हे गोविन्द हे गोपाल अब तो जीवन हारे ।
अब तो जीवन हारे, प्रभु शरण हैं तिहारे ॥

ऊँचे पर्वत चढ़कर जो, तेरे मंदिर आते हैं (Unche Parvat Chadhkar Jo Tere Mandir Aate Hain)

ऊँचे पर्वत चढ़कर जो,
तेरे मंदिर आते हैं,

बालाजी तुम्हारे चरणों में, मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ (Balaji Tumhare Charno Mein Main Tumhe Rjhane Aaya Hun)

बालाजी तुम्हारे चरणों में,
मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ ॥

कन्हैया ने जब पहली बार बजाई मुरली, सारी सृष्टि में आनंद की लहर दौड़ी

मुरलीधर, मुरली बजैया, बंसीधर, बंसी बजैया, बंसीवाला भगवान श्रीकृष्ण को इन नामों से भी जाना जाता है। इन नामों के होने की वजह है कि भगवान को बंसी यानी मुरली बहुत प्रिय है। श्रीकृष्ण मुरली बजाते भी उतना ही शानदार हैं।

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