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वैकुंठ धाम कहां है

Vaikunth Chaturdashi: बैकुंठ धाम कहां और कितने हैं, जानिए रहस्य


वैकुण्ठ धाम एक ऐसा स्थान है जहां कर्महीनता नहीं है, निष्क्रियता नहीं है। कहते हैं कि मरने के बाद पुण्य कर्म करने वाले लोग स्वर्ग या वैकुंठ जाते हैं। सनातन धर्म में बैकुंठ धाम की बहुत चर्चा होती है। शिव लोक, गोलोक, ब्रह्म लोक, पाताल लोक, विष्णु लोक, स्वर्ग लोक और यमलोक होते हैं उसी तरह वैकुंठ लोक भी होता है। आज हम आपको बताएंगे कि वैकुंठ धाम कहां है और कितने हैं... 

वैकुंठ धाम कहां है?


सनातन धर्म के अनुसार कैलाश पर महादेव, ब्रह्मलोक में ब्रह्मदेव बसते हैं। उसी तरह भगवान विष्णु का निवास वैकुंठ में बताया गया है। चूंकि श्री कृष्ण और विष्णु एक ही हैं इसलिए श्रीकृष्ण के निवास स्थान को भी वैकुंठ कहा जाता है। मान्यता है कि इस धाम में जीवात्मा कुछ काल के लिए आनंद और सुख को प्राप्त करती है, लेकिन सुख भोगने के बाद उसे पुन: मृत्युलोक में आना होता है। इस स्थान को स्वर्ग से ऊपर बताया गया है। 

पहला वैकुंठ धाम


धरती पर बद्रीनाथ, जगन्नाथ और द्वारकापुरी को भी वैकुंठ धाम कहा जाता है। चारों धामों में सर्वश्रेष्ठ हिन्दुओं का सबसे पावन तीर्थ बद्रीनाथ, भारत के उत्तर में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु का दरबार माना जाता है। बद्रीनाथ धाम में सनातन धर्म के सर्वश्रेष्ठ आराध्य देव श्री बद्रीनारायण भगवान के 5 स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है। इन 5 रूपों को 'पंच बद्री' के नाम से जाना जाता है। 

'पंच बद्री' के नाम इस प्रकार हैं - श्री विशाल बद्री, श्री योगध्यान बद्री, श्री भविष्य बद्री, श्री वृद्ध बद्री और श्री आदि बद्री। बद्रीनाथ के अलावा द्वारका और जगन्नाथपुरी को भी वैकुंठ धाम कहा जाता है। सतयुग में बद्रीनाथ, त्रेता में रामेश्वरम, द्वापर में द्वारका और कलयुग में जगन्नाथ पुरी को वैकुंठ का महत्व है। पुराणों में धरती के बैकुंठ के नाम से अंकित जगन्नाथ पुरी का मंदिर समस्त दुनिया में प्रसिद्ध है। 

दूसरा वैकुंठ धाम


दूसरे वैकुंठ की स्थिति धरती के बाहर बताई गई है। इसे ब्रह्मांड से बाहर और तीनों लोकों से ऊपर बताया गया है। कहते हैं यह धाम दिखाई देने वाली प्रकृति से 3 गुना बड़ा है। इसकी देखरेख के लिए भगवान के 96 करोड़ पार्षद तैनात हैं। मान्यता है कि हमारी प्रकृति से मुक्त होने वाली हर जीवात्मा इसी परमधाम में शंख, चक्र, गदा और पद्म के साथ प्रविष्ट होती है। वहां से वह जीवात्मा फिर कभी भी वापस नहीं लौटती। यहां श्रीविष्णु अपनी 4 पटरानियों श्रीदेवी, भूदेवी, नीला और महालक्ष्मी के साथ निवास करते हैं। पौराणिक मान्यता है कि इसी वैकुंठ धाम और एकपाद विभूति के मध्य विरजा नामक एक नदी बहती है। इस नदी से ही त्रिपाद विभूति शुरू होती है, जो वैकुंठ लोक है। इस वैकुंठ के बारे में कहा जाता है कि मरने के बाद विष्णु भक्त पुण्यात्मा यहां पहुंच जाती है।


तीसरा वैकुंठ धाम 


भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका के बाद एक और नगर बसाया था जिसे वैकुंठ कहा जाता था। कुछ इतिहासकारों के मुताबिक अरावली की पहाड़ी श्रृंखला पर कहीं वैकुंठ धाम बसाया गया था, जहां इंसान नहीं, सिर्फ साधक ही रहते थे। माना जाता है कि यहीं पर श्रीकृष्ण ने वैकुंठ नगरी बसाई थी।

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