नवीनतम लेख

चक्रधर भगवान की पूजा कैसे करें?

भगवान विष्णु के स्वरूप चक्रधर की पूजा किस विधि से करें, जानें सामग्री और महत्व


भगवान चक्रधर 12वीं शताब्दी के एक महान तत्त्वज्ञ, समाज सुधारक और महानुभाव पंथ के संस्थापक थे। महानुभाव धर्मानुयायी उन्हें ईश्वर का अवतार मानते हैं।  उनका जन्म बारहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में, गुजरात के भड़ोच में हुआ था। उनका जन्म नाम हरीपालदेव था। उन्होंने वैदिक परंपरा को चुनौती देते हुए एक नया धार्मिक पंथ, महानुभाव पंथ की स्थापना की। 


इस पंथ में सभी को समान माना जाता था, चाहे वे किसी भी जाति या वर्ग के हों। उन्होंने स्त्री-शूद्रों को भी मोक्ष का अधिकार दिया। आपको बता दें, महानुभाव पंथ का मुख्य ग्रंथ 'लीलाचरित्र' है, जो चक्रधर स्वामी के जीवन और उपदेशों पर आधारित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि चक्रधर स्वामी भगवान विष्णु के स्वरूप हैं। अब ऐसे में इनकी पूजा किस विधि से करें औप पूजा का महत्व क्या है। आइए भक्त वत्सल के इस लेख में विस्तार से जानते हैं। 



भगवान चक्रधर की पूजा के लिए सामग्री क्या है? 


भगवान चक्रधर महानुभाव पंथ के संस्थापक हैं और उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इनकी पूजा के लिए सामग्री के बारे में विस्तार से जान लें। 

  • चक्रधर स्वामी की प्रतिमा
  • फूल
  • फल
  • मिठाई
  • धूप और दीप
  • चंदन
  • कुंकुम
  • चावल
  • नैवेद्य
  • गंगाजल
  • पंचामृत
  • मौली
  • यज्ञोपवीत
  • शंख
  • पंच पल्लव
  • सप्तधान्य
  • दूर्वा
  • कुशा
  • घंटा



भगवान चक्रधर की पूजा किस विधि से करें?


  • भगवान चक्रधर, जो श्री विष्णु के एक रूप माने जाते हैं, की पूजा विशेष रूप से विधिपूर्वक और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। चक्रधर भगवान का चक्र या "सुदर्शन चक्र" उनके महान अस्त्र के रूप में जाना जाता है, जो धर्म और सत्य की रक्षा करता है। 
  • पूजा के लिए स्वच्छ और शुद्ध स्थान का चयन करें।
  • सबसे उत्तम समय भगवान चक्रधर की पूजा के लिए नवमी, एकादशी और पूर्णिमा जैसे पवित्र दिन होते हैं, लेकिन किसी भी दिन जब आपको भगवान से जुड़ने का मन हो, पूजा की जा सकती है।
  • सबसे पहले पूजा करने से पूर्व स्वयं स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थल को साफ करें, फिर वहां एक पीतल या तांबे की थाली रखें।
  • पूजा में घी का दीपक और धूप जलाएं। 
  • चक्रधर भगवान के चरणों में पुष्प, फल, पानी और अक्षत अर्पित करें।
  • भगवान चक्रधर को चंदन और कुमकुम लगाएं। 
  • भगवान चक्रधर रे मंत्रों का जाप जरूर करें। 
  • ॐ श्री चक्रधराय नमः"
  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • भगवान चक्रधर की पूजा करते समय उनके चक्र की भी पूजा करें। 
  • चक्र की पूजा करने से पापों का नाश और जीवन में विजय प्राप्ति होती है।
  • आखिर में भगवान चक्रधर की आरती जरूर करें। 



भगवान चक्रधर की पूजा का महत्व क्या है? 


भगवान चक्रधर, जिन्हें भगवान विष्णु का एक रूप माना जाता है, की पूजा का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत अधिक है। चक्रधर शब्द का अर्थ होता है "चक्र धारण करने वाला" और भगवान विष्णु को अक्सर "सुदर्शन चक्र" धारण करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र न केवल उनका अस्तित्व, बल्कि धर्म और सत्य की रक्षा का प्रतीक है। यह चक्र पापियों और असुरों पर विजय पाने और संसार में सदाचार की स्थापना का उपाय माना जाता है। चक्रधर की पूजा से जीवन में बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। जो व्यक्ति इस चक्र की पूजा करता है, वह हर प्रकार के संकट और मानसिक परेशानियों से मुक्त हो सकता है।



कैसे करें एकादशी माता का श्रृंगार?

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान विष्णु और माता एकादशी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

मेरा आपकी दया से सब काम हो रहा है - भजन (Mera Aap Ki Kripa Se Sab Kam Ho Raha Hai)

मेरा आपकी दया से सब काम हो रहा है।
करते हो तुम कन्हिया मेरा नाम हो रहा है॥

जिस पर हो हनुमान की कृपा(Jis Par Ho Hanuman Ki Kripa)

जिस पर हो हनुमान की कृपा,
तकदीर का धनी वो नर है,

मानो तो मैं गंगा माँ हूँ - भजन (Mano Toh Main Ganga Maa Hun)

मानो तो मैं गंगा माँ हूँ,
ना मानो तो बहता पानी,

यह भी जाने