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मासिक शिवरात्रि के दिन इस विधि से करें जलाभिषेक

Masik Shivaratri: विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मासिक शिवरात्रि पर करें जलाभिषेक, जानें विधि


हिंदू धर्म में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित किया गया है। इस दिन को हर महीने मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। भक्तगण इस दिन व्रत रखते हैं और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। खासकर, शिवलिंग पर जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर सच्चे मन से व्रत और जलाभिषेक करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस लेख में जानें कि किस विधि से भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए।


जनवरी में कब है मासिक शिवरात्रि?


इस साल मासिक शिवरात्रि 27 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी।


हिंदू पंचांग के अनुसार:

  • चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: सुबह 8:34 बजे (27 जनवरी)।
  • चतुर्दशी तिथि का समाप्ति: शाम 7:35 बजे (28 जनवरी)।


मासिक शिवरात्रि में इस तरह करें जलाभिषेक


1) स्नान और स्वच्छता:

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें, और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • तन और मन की शुद्धता पूजा के लिए आवश्यक है।


2) पूजा स्थल की सफाई:

  • पूजा स्थल को साफ करें और उसे गंगाजल से शुद्ध करें।
  • शिवलिंग को पूजा स्थल पर स्थापित करें।


3) अभिषेक का तरीका:

  • भगवान शिव का अभिषेक गंगाजल, कच्चे दूध, दही, शहद, और घी से करें।
  • हर सामग्री को श्रद्धा के साथ भगवान को अर्पित करें।


4) पत्तों की अर्पण:

  • भगवान शिव को बेलपत्र और समी के पत्ते चढ़ाएं।
  • यह अभिषेक को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।


5) धूप-दीप जलाना:

  • पूजा स्थल पर धूप और घी का दीपक जलाएं।
  • इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


6) भोग अर्पित करना:

  • भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
  • भोग अर्पण के बाद प्रसाद को परिवार के साथ बांटें।


7) मंत्र जाप:

i) भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें:

  • "ॐ नमः शिवाय।"
  • "ॐ महादेवाय नमः।"

ii) कम से कम 108 बार मंत्र जाप करें।


8) आरती:

  • पूजा समाप्ति के बाद भगवान शिव की आरती करें।
  • आरती के दौरान शंख और घंटी बजाएं।


मासिक शिवरात्रि व्रत का महत्व


1) दुखों का निवारण:

मासिक शिवरात्रि पर किया गया व्रत और पूजन जीवन के सभी दुखों को दूर करता है।


2) कष्टों का नाश:

भगवान शिव की पूजा से जीवन के कष्ट समाप्त होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।


3) विवाह में बाधाएं दूर करना:

यदि किसी के विवाह में बाधा आ रही हो, तो मासिक शिवरात्रि का व्रत उन बाधाओं को समाप्त करता है।


4) चंद्रमा से जुड़ी समस्याओं का समाधान:

भगवान शिव का जलाभिषेक करने से कुंडली में चंद्रमा से जुड़ी समस्याओं का निवारण होता है।


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काली सहस्त्रनाम (Kali Sahastranam)

श्मशान-कालिका काली भद्रकाली कपालिनी ।

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