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ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है: शिव भजन (Oh Vish Pine Wale Chupa Tu Kidhar Hai)

मेरी जिंदगी में ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


ना तुमसा दयालु कोई और भोले,

ना तुमसा दयालु कोई और भोले,

जो ठुकरा के अमृत को पिए विष के प्याले,

लिया तीनों लोकों का भार अपने सर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


गरीबों का साथी ना बनता है कोई,

फ़साने भी उनके ना सुनता है कोई,

यहाँ फेर ली अपनों ने भी नजर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


बड़ी आस लेकर केतुमको पुकारा,

करदो दया मुझपे हूँ ग़म का मारा,

कहे सोनू होता ना मुझसे सबर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

मेरी जिंदगी में ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥

ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम्

ॐ अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपति-स्तोत्रमन्त्रस्य
शुक्राचार्य ऋषिः ऋणविमोचनमहागणपतिर्देवता

कर किरपा तेरे गुण गावा - शब्द कीर्तन (Kar Kirpa Tere Gun Gaawa)

कर किरपा तेरे गुण गाँवा,
नानक नाम जपत सुख पाँवा,

हर सांस मे हो सुमिरन तेरा (Har Saans Me Ho Sumiran Tera)

हर सांस मे हो सुमिरन तेरा,
यु बित जाये जीवन मेरा,

चंद्र दर्शन का महत्व क्या है

मार्गशीर्ष माह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस माह में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि का आगमन होता है। चंद्र देव को मन का कारक और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना गया है।

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