नवीनतम लेख

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है: शिव भजन (Oh Vish Pine Wale Chupa Tu Kidhar Hai)

मेरी जिंदगी में ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


ना तुमसा दयालु कोई और भोले,

ना तुमसा दयालु कोई और भोले,

जो ठुकरा के अमृत को पिए विष के प्याले,

लिया तीनों लोकों का भार अपने सर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


गरीबों का साथी ना बनता है कोई,

फ़साने भी उनके ना सुनता है कोई,

यहाँ फेर ली अपनों ने भी नजर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


बड़ी आस लेकर केतुमको पुकारा,

करदो दया मुझपे हूँ ग़म का मारा,

कहे सोनू होता ना मुझसे सबर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

मेरी जिंदगी में ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥

जन्माष्टमी पर जरूर पढ़ें ये कथा

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं, क्योंकि यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण ने माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया था।

कैंलाश शिखर से उतर कर (Kailash Shikhar Se Utar Kar)

कैलाश शिखर से उतर कर,
मेरे घर आए है भोले शंकर ॥

होली आई रे होली आई रे(Holi Ae Re Holi Aae Re)

होली आई रे होली आई रे होली आई वृन्दावन खेले गोरी
भागन पे आयो है फागण महीना कभू प्रेम की होरी बईं न,

मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन करें ये विशेष उपाय

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष महीने को भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना माना गया है। ऐसे में इस माह में पड़ने वाली पूर्णिमा का महत्व कई गुना अधिक है। इसे मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहा जाता है, जो इस साल 15 दिसंबर को है।

यह भी जाने