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शंकर दयालु दूसरा, तुमसा कोई नहीं (Shankar Dayalu Dusra Tumsa Koi Nahi)

शंकर दयालु दूसरा,

तुमसा कोई नहीं,

देने से पहले तू जरा,

क्यों सोचता नहीं,

शंकर दयालु दुसरा,

तुमसा कोई नहीं ॥


भस्मासुर ने भक्ति से,

तुझको रिझा लिया,

वरदान भस्म करने का,

दानव ने पा लिया,

तुझको ही भस्म करने की,

पापी ने ठान ली,

देने से पहले तू जरा,

क्यों सोचता नहीं,

शंकर दयालु दुसरा,

तुमसा कोई नही ॥


गिरिजा की जिद पे था बना,

सोने का वो महल,

मोहरत कराने आया था,

रावण पिता के संग,

सोने की लंका दुष्ट की,

झोली में डाल दी,

देने से पहले तू जरा,

क्यों सोचता नहीं,

शंकर दयालु दुसरा,

तुमसा कोई नहीं ॥


मंथन की गाथा क्या कहे,

क्या क्या नहीं हुआ,

अमृत पिलाया देवों को,

और विष तू पी गया,

देवों का देव ‘हर्ष’ तू,

दुनिया ये जानती,

देने से पहले तू जरा,

क्यों सोचता नहीं,

शंकर दयालु दुसरा,

तुमसा कोई नहीं ॥


शंकर दयालु दूसरा,

तुमसा कोई नहीं,

देने से पहले तू जरा,

क्यों सोचता नहीं,

शंकर दयालु दुसरा,

तुमसा कोई नहीं ॥

मैं थाने सिवरू गजानन देवा - भजन (Main Thane Sivaru Gajanan Deva)

मैं थाने सिवरू गजानन देवा,
वचनों रा पालनहारा जी ओ ॥

चंद्र दर्शन का महत्व क्या है

मार्गशीर्ष माह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस माह में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि का आगमन होता है। चंद्र देव को मन का कारक और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना गया है।

मेरी लगी शंभू से प्रीत, ये दुनिया क्या जाने(Meri Lagi Shambhu Se Preet Ye Duniya Kya Jane)

मेरी लगी शंभू से प्रीत,
ये दुनिया क्या जाने,

वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी नामक एकादशी (Vaishaakh Shukl Paksh Kee Mohinee Naamak Ekaadashee)

भगवान् कृष्ण के मुखरबिन्द से इतनी कथा सुनकर पाण्डुनन्दन महाराज युधिष्ठिर ने उनसे कहा - हे भगवन् ! आपकी अमृतमय वाणी से इस कथा को सुना परन्तु हृदय की जिज्ञासा नष्ट होने के बजाय और भी प्रबल हो गई है।

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