नवीनतम लेख

बाबा का दरबार सुहाना लगता है (Baba Ka Darbar Suhana Lagta Hai)

बाबा का दरबार सुहाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


हमने तो बड़े प्यार से कुटिया बनायीं है,

कुटिया में बाबा तेरी मूरत सजाई है,

अच्छा हमें तुमको सजाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


बाबा का दरबार सुहाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


रंग बिरंगे फूलो की लड़िया लगे प्यारी,

बालाजी तेरी सूरत हमे लागे बड़ी न्यारी,

अच्छा हमें तुझको मनाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


बाबा का दरबार सुहाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


हम तेरी राहों को पलकों से बुहारेंगे,

तुम ना आओगे तो बाबा तुम्हें पुकारेंगे,

अच्छा हमें तुझको बुलाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


बाबा का दरबार सुहाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


हम तेरी चोखट पे बाबा बिछ-बिछ जायेंगे,

कहते है भक्त तेरी महिमा गाएँगे,

अच्छा हमे रिश्ता निभाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


बाबा का दरबार सुहाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥


बाबा का दरबार सुहाना लगता है,

भक्तों का तो दिल दीवाना लगता है ॥

विनायक चतुर्थी की पौराणिक कथाएं

हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का व्रत किया जाता है। इस खास अवसर पर गणपति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही विशेष प्रकार का व्रत भी किया जाता है।

गणगौर व्रत की पौराणिक कथा

गणगौर व्रत चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, जिसे गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत का विशेष महत्व विवाहित और अविवाहित महिलाओं के लिए होता है।

अहोई अष्टमी का महत्व और मुहूर्त

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। यह व्रत माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन माताएं अपने पुत्रों की कुशलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए निर्जला व्रत करती हैं।