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परदे में बैठे, यूँ ना मुस्कुराइये (Parde Me Bethe Bethe Yun Na Muskuraiye)

परदे में बैठे-बैठे,

यूँ ना मुस्कुराइये,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


परदा तेरा हमें नहीं,

मंजूर सांवरे,

बैठा है छुप के दीवानो से,

क्यों दूर सांवरे,

मैं भी तो आया दो कदम,

जरा तुम भी बढ़ाइए,

आगए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


हम चाहने वाले हैं तेरे,

हमे है तुमसे मोहब्बत,

कर दो करम जरा दिखा दो,

अब सांवरी सूरत,

प्यासी निगाहे दीद की,

जरा नजरे मिलाइए,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


तेरी इक झलक को प्यारे,

मेरा अब दिल बेकरार है,

दीदार की तमन्ना मुझे अब,

तेरा इंतजार है,

रह-रह के हमें इस तरह,

यूँ न सताइए,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


तू ही जिंदगी है बंदगी,

तू ही आरजू हमारी,

अरमान मेरे दिल का करो,

पूरा बांके बिहारी

चित्र विचत्र को अपने प्रेम का,

पागल बनाइये ,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


परदे में बैठे-बैठे,

यूँ ना मुस्कुराइये,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥

शीतला अष्टमी व्रत कथा

शीतला अष्टमी का पर्व श्रद्धा और नियमों का पालन करने का दिन होता है। इस दिन विशेष रूप से ठंडे भोजन का सेवन किया जाता है, क्योंकि माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।

आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर (Aayo Gandgaon Se Holi Khelan Natwar Nand Kishor)

आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर ।
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर ।

तुम जो कृपा करो तो, मिट जाये विपदा सारी(Tum Jo Kripa Karo To Mit Jaye Vipda Sari)

तुम जो कृपा करो तो,
मिट जाये विपदा सारी,

दुर्गाष्टमी में क्या करें और क्या नहीं

मासिक दुर्गाष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है जिसे हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन मां दुर्गा की आराधना और व्रत के लिए शुभ माना जाता है।