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सतगुरु मैं तेरी पतंग(Satguru Main Teri Patang)

सतगुरु मैं तेरी पतंग,

बाबा मैं तेरी पतंग,

हवा विच उडदी जावांगी,

हवा विच उडदी जावांगी ।

साईयां डोर हाथों छोड़ी ना,

मैं कट्टी जावांगी ॥


तेरे चरना दी धूलि साईं माथे उते लावां,

करा मंगल साईंनाथ गुण तेरे गावां।

साईं भक्ति पतंग वाली डोर, अम्बरा विच उडदी फिरा ॥


बड़ी मुश्किल दे नाल मिलेय मेनू तेरा दवारा है ।

मेनू इको तेरा आसरा नाले तेरा ही सहारा है ।

हुन तेरे ही भरोसे, हवा विच उडदी जावांगी,

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी ॥


ऐना चरना कमला नालो मेनू दूर हटावी ना ।

इस झूठे जग दे अन्दर मेरा पेचा लाई ना ।

जे कट गयी ता सतगुरु, फेर मैं लुट्टी जावांगी,

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी ॥


अज्ज मलेया बूहा आके मैं तेरे द्वार दा ।

हाथ रख दे एक वारि तूं मेरे सर ते प्यार दा ।

फिर जनम मरण दे गेडे तो मैं बच्दी जावांगी,

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी ॥


नवंबर-दिसंबर से लेकर साल 2025 तक यह हैं शादी के लिए सबसे शुभ मुहूर्त

हिन्दू धर्म में मुहुर्त का कितना महत्व है इस बात को समझने के लिए इतना ही काफी है कि हम मुहुर्त न होने पर शादी विवाह जैसी रस्मों को भी कई कई महिनों तक रोक लेते हैं।

शंकर के द्वारे चले काँवरिया (Shankar Ke Dware Chale Kavariya)

शंकर के द्वारे चले काँवरिया
भोले के प्यारे चले काँवरिया

स्कंद षष्ठी व्रत की पौराणिक कथा

स्कंद षष्ठी व्रत भगवान कार्तिकेय जिन्हें मुरुगन, सुब्रमण्यम और स्कंद के नाम से भी जाना जाता है उनकी पूजा को समर्पित है। यह व्रत मुख्यतः दक्षिण भारत में मनाया जाता है। भगवान कार्तिकेय को युद्ध और शक्ति के देवता के रूप में पूजते हैं।

मेरे शंकर भोले भाले, बेड़ा पार लगाते है(Mere Shankar Bhole Bhale Beda Paar Lagate Hai)

मेरे शंकर भोले भाले,
बेड़ा पार लगाते है,