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तृष्णा ना जाए मन से - भजन (Trishna Na Jaye Man Se)

तृष्णा ना जाये मन से ॥


दोहा – मथुरा वृन्दावन सघन,

और यमुना के तीर,

धन्य धन्य माटी सुघर,

धन्य कालिंदी नीर ॥

कृष्णा बोलो कृष्णा,

हरे कृष्णा राधे कृष्णा ॥


तृष्णा ना जाये मन से,

कृष्णा ना आये मन में,

जतन करूँ मैं हजार,

कैसे लगेगी नैया पार,

घनश्याम जी,

कैसे लगेगी नैया पार ॥


इक पल माया साथ ना छोड़े,

जिधर जिधर चाहे मुझे मोड़े,

हरी भक्ति से हरी पूजन से,

मेरा रिश्ता नाता तोड़े,

माया ना जाये मन से,

भक्ति ना आये मन में,

जीवन ना जाये बेकार,

कैसे लगेगी नैया पार,

मेरे श्याम जी,

कैसे लगेगी नैया पार ॥


क्षमा करो मेरे गिरिवर धारी,

चंचलता मन की लाचारी,

लगन जगा दो मन में स्वामी,

तुम हो प्रभु जी अंतर्यामी,

मन ना बने अनुरागी,

भावना बने ना त्यागी,

दया करो करतार,

कैसे लगेगी नैया पार,

घनश्याम जी,

कैसे लगेगी नैया पार ॥


तृष्णा ना जाए मन से,

कृष्णा ना आये मन में,

जतन करूँ मैं हजार,

कैसे लगेगी नैया पार,

घनश्याम जी,

कैसे लगेगी नैया पार ॥

अवध बिहारी हो, हम आए शरण तिहारी (Awadh Bihari Ho,Hum Aaye Sharan Tihari)

अवध बिहारी हो,
हम आए शरण तिहारी,

आनंद ही आनंद बरस रहा (aanand-hi-aanand-baras-raha)

आनंद ही आनंद बरस रहा
बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

जरा चलके अयोध्या जी में देखों (Jara Chalke Ayodhya Ji Me Dekho)

जरा चल के अयोध्या जी में देखो,
राम सरयू नहाते मिलेंगे ॥

सोमवती अमावस्या व्रत से बदलेगी किस्मत

सनातन हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि काफ़ी महत्वपूर्ण माना जाता है। अमावस्या तिथि कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन होती है और इस दिन आकाश में चांद दिखाई नहीं देता है। प्रत्येक साल कुल 12 अमावस्या पड़ती हैं।