समुद्र मंथन और धनवंतरी की कहानी: धनतेरस व्रत कथा (Samudra Manthan aur Dhanvantari ki kahani)

प्राचीन कल की बात हैं दुर्वासा ऋषि के शाप के कारण सभी देवता भगवान विष्णु के साथ शक्तिहीन हो गए थे और साथ ही असुरो की शक्ति भी बढ़ गई थी। जिसके कारण भगवान नारायण ने देवताओ को असुरों के साथ मिलकर सागर मंथन करने का आदेश दिया। 


भगवान की आज्ञा से जब देवताओं ने सागर मंथन किया तो एक-एक करके सागर से 16 रत्न प्रकट हुए। सबसे अंत में हाथ में अमृत का कलश लेकर भगवान धन्वंतरि अवतरित हुए। जिस दिन भगवान धन्वंतरि का अवतार हुआ था। वह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी का दिन था। 


तभी से उस दिन को धन्वंतरि त्रयोदशी यानी (धनतेरस) के नाम से जाना जाने लगा। इस मंगलमय कथा को पढ़ने, सुनने और लोगों को सुनने वालों को अरोग्य को प्राप्त होता हैं और वह निरोगी जीवन जीते हैं। 


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