गजानन करदो बेड़ा पार(Gajanan Kardo Beda Paar)

गजानन करदो बेड़ा पार,

आज हम तुम्हे मनाते हैं,

तुम्हे मनाते हैं,

गजानन तुम्हे मनाते हैं ॥

सबसे पहले तुम्हें मनावें,

सभा बीच में तुम्हें बुलावें,

सभा बीच में तुम्हें बुलावें है ।

॥ गजानंद कर दो बेड़ा पार...॥


आओ पार्वती के लाला,

मूषक वाहन सूंड सुन्दाला,

मूषक वाहन सूंड सुन्दाला ।

॥ गजानंद कर दो बेड़ा पार...॥


भक्त जनों ने टेर लगाई,

सबने मिलकर महिमा गाई,

सबने मिलकर महिमा गाई ।

॥ गजानंद कर दो बेड़ा पार...॥


उमापति शंकर के प्यारे,

तू भक्तों के काज सवारे,

तू भक्तों के काज सवारे ।

॥ गजानंद कर दो बेड़ा पार...॥


लड्डू पेडा भोग लगावें,

पान सुपारी पुष्प चढावें,

पान सुपारी पुष्प चढावें ।

॥ गजानंद कर दो बेड़ा पार...॥


गजानन कर दो बेड़ा पार,

आज हम तुम्हे मनाते हैं,

तुम्हे मनाते हैं,

गजानन तुम्हे मनाते हैं ॥

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सुध ले लो मेरी घनश्याम - भजन (Sudh Le Lo Meri Ghanshyam)

सुध ले लो मेरी घनश्याम,
आप आए नहीं,

रुक्मिणी अष्टमी की कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। देवी रुक्मिणी मां लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से एक थीं।

मिश्री से भी मीठा नाम तेरा(Mishri Se Bhi Meetha Naam Tera)

मिश्री से भी मीठा नाम तेरा,
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श्री प्रेतराज चालीसा (Shree Pretraj Chalisa)

गणपति की कर वंदना, गुरू चरनन चितलाये।
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