तुम्हे वंदना तुम्हें वंदना (Tumhe Vandana Tumhe Vandana)

तुम्हे वंदना तुम्हें वंदना,

हे बुद्धि के दाता,

सब वेदों के ज्ञाता,

तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना ॥


एक दंत दयावंत,

चार भुजा धारी,

माथे पे सिंदूर सोहे,

मूसे की सवारी,

मैया तुम्हे बुलाए,

गोरा तुम्हे बुलाए,

कह कह के ललना,

तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना ॥


पान चढ़े फूल चढ़े,

और चढ़े मेवा,

लड्डअन का भोग लगे,

संत करें सेवा,

भोले बाबा तुम्हें झुलावे,

शंकर बाबा तुम्हें झुलावे,

रेशम के पलना,

तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना ॥


अंधन को आंख देत,

कोडिन को काया,

बांझन को पुत्र देत,

निर्धन को माया,

भक्तों की विनती को,

दीनों की विनती को,

अब गणपति जी सुनना,

तुम्हें वंदना है तुम्हें वंदना ॥


तुम्हे वंदना तुम्हें वंदना,

हे बुद्धि के दाता,

सब वेदों के ज्ञाता,

तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना ॥

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प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी (Prarthana Hai Yahi Meri Hanuman Ji)

प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए,

सोमवती अमावस्या व्रत कथा

अमावस्या का हिंदू धर्म में खास महत्व होता है। सोमवार को पड़ने की वजह से इस अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दौरान पितरों की पूजा होती है। दिसंबर माह में सोमवती अमावस्या सोमवार, 30 दिसंबर 2024 को है।

राम आ गए, धन्य भाग्य शबरी हर्षाए(Ram Aa Gaye Dhanya Bhagya Sabari Harshaye)

राम आ गए,
धन्य भाग्य शबरी हर्षाए ॥

उत्पन्ना एकादशी के नियम

उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। उत्पन्ना एकादशी की उत्पत्ति का उल्लेख प्राचीन भविष्योत्तर पुराण में मिलता है, जहां भगवान विष्णु और युधिष्ठिर के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद में इसका वर्णन किया गया है।

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