राम आ गए, धन्य भाग्य शबरी हर्षाए(Ram Aa Gaye Dhanya Bhagya Sabari Harshaye)

राम आ गए,

धन्य भाग्य शबरी हर्षाए ॥


आँखों में प्रेम आंसू,

चरणों को धो रही है,

मारे ख़ुशी के शबरी,

व्याकुल सी हो रही है,

क्या लाऊँ क्या खिलाऊँ,

कुछ भी समझ ना आए,

राम आ गये,

धन्य भाग्य शबरी हर्षाए ॥


वन से जो तोड़कर वो,

दोना में बेर लायी,

सकुचा के मन में शबरी,

श्री राम को बढ़ाई,

श्री राम को दिया जब,

तो भी लखन ना खाए,

राम आ गये,

धन्य भाग्य शबरी हर्षाए ॥


राम आ गए,

धन्य भाग्य शबरी हर्षाए ॥

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श्री गणपत्यथर्वशीर्षम् स्तोत्रम्

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयामदेवाः भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवाꣳ सस्तनूभिःव्यशेम देवहितं यदायुः॥

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