उठ खड़ा हो लक्ष्मण भैया जी ना लगे (Uth Khada Ho Lakshman Bhayia Ji Na Lage)

उठ खड़ा हो लक्ष्मण भैया जी ना लगे,

लखनवा नही जाना की जी ना लगे ॥


सुनले लक्ष्मण भैया रोएगी तेरी मैया,

मुखड़ा दिखलाऊंगा कैसे,

मुखड़ा दिखलाऊंगा कैसे,

जी ना लगे,

लखनवा नही जाना की जी ना लगे ॥


सुन मेरे बजरंगी अब तू ही मेरा संगी,

ला कर दे संजीवन बूटी,

ला कर दे संजीवन बूटी,

जी ना लगे,

लखनवा नही जाना की जी ना लगे ॥


संजीवन बूटी लाई लक्ष्मण को घोल पिलाई,

गले मिल गये दोनो भैया,

गले मिल गये दोनो भैया,

जी ना लगे,

लखनवा नही जाना की जी ना लगे ॥


भक्त मंडल ने गाइ तेरी महिमा बर्नी ना जाये,

भव सागर मे नैया डोले,

भव सागर मे नैया डोले,

जी ना लगे,

लखनवा नही जाना की जी ना लगे ॥


उठ खड़ा हो लक्ष्मण भैया जी ना लगे,

लखनवा नही जाना की जी ना लगे ॥

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साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम(Sanso Ki Mala Pe Simru Main Pee Ka Naam)

साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,

हे मेरे गुरुदेव करुणा सिन्धु करुणा कीजिये (He Mere Gurudev Karuna Sindhu Karuna Keejiye)

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

विवाह पंचमी कब है

विवाह पंचमी एक विशेष हिंदू पर्व है, जो भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह के अवसर पर मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से रामभक्तों के लिए महत्वपूर्ण है।

Shri Pitra Chalisa (श्री पितृ चालीसा)

हे पितरेश्वर नमन आपको, दे दो आशीर्वाद,
चरणाशीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ।

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