उलझ मत दिल बहारो में (Ulajh Mat Dil Baharo Men)

उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या

तू संबल नाम का लेकर,

किनारों से किनारा कर

किनारे टूट जाते हैं,

किनारो का भरोसा क्या


उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या


पथिक तू अक्लमंदी पर,

बिचारो पर ना इतराना

कहाँ कब मन बिगड़ जाये,

बिचारो का भरोसा क्या


उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या


उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या

........................................................................................................
कार्तिगाई पर जलाएं पांच दीपक

मासिक कार्तिगाई एक विशेष हिंदू त्योहार है। यह मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मनाया जाता है। इस दिन दीप जलाने की परंपरा है। इस दिन खासकर घरों और मंदिरों में दीपक जलाया जाता है।

श्याम ने रंगस्या जी: भजन (Shyam Ne Rangsya Ji)

मेलो फागण को खाटू में चालो,
श्याम ने रंगस्या जी,

हे शिव भोले मुझ पर, दो ऐसा रंग चढ़ाय(Hey Shiv Bhole mMujhpar Do Aisa Rang Chadaye)

हे शिव भोले मुझ पर,
दो ऐसा रंग चढ़ाय,

भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना है मार्गशीर्ष, जानिए कैसे करें इस माह में उनकी पूजा

मार्गशीर्ष माह कब शुरू हो रहा है? ये श्रीकृष्ण की पूजा के लिए क्यों है खास? इस आलेख में जानें कार्तिक माह के बाद आने वाले मार्गशीर्ष के महत्व और लाभ।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।