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आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा (Aa Maan Aa Tujhe Dil Ne Pukaara)

आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा ।

दिल ने पुकारा तू है मेरा सहारा माँ ॥

शेरांवाली, जोतांवाली, मेहरांवाली माँ ।

आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा ॥

प्रेम से बोलो, जय माता दी ।

सारे बोलो, जय माता दी ।

मिल के बोलो, जय माता दी ।

फिर से बोलो, जय माता दी ।


मैंने मन से तेरी पूजा की है सांझ सवेरे ।

मुझ को दर्शन दे के मैया, भाग जगा दे मेरे ।

मैंने मन से तेरी पूजा की है सांझ सवेरे ।

मुझ को दर्शन दे के मैया, भाग जगा दे मेरे ।

मैया मैया बोले मेरा, मन एक तारा माँ ॥

॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥


तूने ही पाला है मुझको, तू ही मुझे संभाले ।

तूने ही मेरे जीवन मे, पल पल किये उजाले ।

तूने ही पाला है मुझको, तू ही मुझे संभाले ।

तूने ही मेरे जीवन मे, पल पल किये उजाले ।

चरणों मे तेरे मैंने, तन मन वारा माँ ॥

॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥


मान ले मेरी विनती मैया, एक झलक दिखला दे ।

रूप की शीतल किरणों से नयनो के द्वार सजा दे ।

मान ले मेरी विनती मैया, एक झलक दिखला दे ।

रूप की शीतल किरणों से नयनो के द्वार सजा दे ।

नो को रूप तेरा लगता है प्यारा माँ ॥

॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥


जय माता दी, जय माता दी ।

कष्ट निवारे, शेरों वाली ।

पार लगादे, शेरों वाली ।

है दुःख हरनी, शेरों वाली ।

बिगड़ी बना दे, शेरों वाली ।


प्रेम से बोलो, जय माता दी ।

सारे बोलो, जय माता दी ।

जोर से बोलो, जय माता दी ।

ऐसा दरबार कहाँ, ऐसा दातार कहाँ (Aisa Darbar Kahan Aisa Datar Kaha)

ऐसा दरबार कहाँ,
ऐसा दातार कहाँ,

राम नवमी पौराणिक कथा

हिन्दू धर्म का रामायण और रामचरितमानस दो प्रमुख ग्रंथ है। आपको बता दें कि आदिकवि वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना की है तो वहीं तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना की है।

नवंबर में इस दिन रखा जाएगा प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं और उनके निमित्त प्रदोष व्रत रखते हैं।

सामा-चकेवा और मुढ़ी-बतासे

सामा-चकेवा मिथिलांचल में भाई-बहन के प्रेम और अपनत्व का प्रतीक है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल सप्तमी से कार्तिक पूर्णिमा तक नौ दिन चलता है।