नवीनतम लेख

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी (Ab Naa Banegi Too Phir Na Banegi)

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता


हीरा सा जनम क्यों विरथा गवायों

ना सत्संग कियो हरी गुण गायो

जननी तेरी तुझे फिर ना जनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता


अब ना बानी तो,

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता


तेरी जवानी भरम भुलानी

गुरु पितु मात की बात मानी

नैया कहो कैसे पार लगेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता


अब ना बानी तो,

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता


ओ प्राणी तेरी माटी

धरणी गिरत है पतंग ज्यो काटी

माटी में माटी मिल रहेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता


अब ना बानी तो,

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता


अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

नर तन बार बार नहीं मिलता

नर तन बार बार नहीं मिलता

फागण को महीनो, लिख दीन्यो बाबा जी के नाम (Fagan Ko Mahino Likh Dino Baba Ji Ke Naam)

फागण को महीनो,
लिख दीन्यो बाबा जी के नाम,

स्कंद षष्ठी व्रत कथा

स्कंद षष्ठी का व्रत हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2025 की पहली स्कन्द षष्ठी 05 जनवरी को मनाई जाएगी।

शिव की जटा से बरसे, गंगा की धार है (Shiv Ki Jata Se Barse Ganga Ki Dhar Hai)

शिव की जटा से बरसे,
गंगा की धार है,

बजरंग बाण (Bajrang Baan)

निश्चय प्रेम प्रतीति ते,
बिनय करैं सनमान ।