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गजानंद जी ने, ल्यावो रे मनाय, वारी जाऊं (Gajanand Ji Ne Lavo Re Manay Vari Jaun)

गजानंद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में,

चरणन में देवा चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥

सूंड सुंडाला दुंद दूण्डाला,

म्हारी सभा में रंग बरसाय,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


पार्वती रा पुत्र हो प्यारा,

शिव शंकर रा राज दुलार,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


चढ़न चढ़ावा चूरमो,

थारे लड्डुवन रो भोग लगाय,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


रणत भवन स्यूं आवो गजानंद,

रिद्धि सिद्धि ने संग में लाय,

वारी जाऊं चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


गजानंद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में,

चरणन में देवा चरणन में,

गजानँद जी ने,

ल्यावो रे मनाय,

वारी जाऊं चरणन में ॥


Skanda Sashti 2024: स्कंद षष्ठी व्रत, कथा और इसका पौराणिक महत्व

Skanda Sashti 2024: भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को रात 07 बजकर 58 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 09 बजकर 53 मिनट पर होगा। ऐसे में स्कंद षष्ठी का पर्व 09 सितंबर को मनाया जाएगा।

होरी खेली न जाय (Hori Kheli Na Jaay)

नैनन में पिचकारी दई,
मोय गारी दई,

हे शिवशंकर, हे करुणाकर(Hey Shivshankar Hey Karunakar)

हे शिवशंकर हे करुणाकर,
हे परमेश्वर परमपिता

करवा चौथ व्रत-कथा की कहानी (Karva Chauth Vrat-katha Ki Kahani)

अतीत प्राचीन काल की बात है। एक बार पाण्डु पुत्र अर्जुन तब करने के लिए नीलगिरि पर्वत पर चले गए थे।

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