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मैं दो-दो माँ का बेटा हूँ (Main Do-Do Maa Ka Beta Hun)

मैं दो-दो माँ का बेटा हूँ,

दोनों मैया बड़ी प्यारी है ।

एक माता मेरी जननी है,

एक जग की पालनहारी है ॥


मैं जननी को जब माँ कहता,

वो सिर पर हाथ फिराती है ।

त्रिशूल रुपणी दादी को,

वो जगमाता बतलाती है ।

मैं उसकी गोद में जाता हूँ,

वो तेरी शरण दिखलाती है ।

अब शरण में तेरी आया हूँ,

तू क्यों नहीं गले लगाती है ॥

॥ मैं दो-दो माँ का बेटा हूँ...॥


मेरी जननी ओझल हुई,

पर तुम तो समाने हो मेरे ।

वो इसी भरोसे छोड़ गई,

कि तुम तो साथ में हो मेरे ।

अब दिल जो माँ को याद करे,

वो सीधे तेरे दर जाए ।

हे जग जननी तेरी छवि में ही,

मेरी मैया मुझे नजर आए ॥

॥ मैं दो-दो माँ का बेटा हूँ...॥


जनंनी ने मुझको जन्म दिया,

तुम बन के यशोदा पाली हो ।

मेरी जनंनी की भी जननी तुम,

दादीजी झुंझुनुवाली हो ।

वो लोरी मुझे सुनाती है,

तुम सत्संग मुझे कराती हो ।

वो भोजन मुझे खिलाती है,

तुम छप्पन भोग जिमाती हो ॥

॥ मैं दो-दो माँ का बेटा हूँ...॥


मैं दो-दो माँ का बेटा हूँ,

दोनों मैया बड़ी प्यारी है ।

एक माता मेरी जननी है,

एक जग की पालनहारी है ॥

सुहागिनों के लिए क्यों खास है गणगौर

गणगौर व्रत भारतीय संस्कृति में स्त्रियों की श्रद्धा, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

आते हैं हर साल नवराते माता के

हो, चैत महीना और अश्विन में, ओ..
चैत महीना और अश्विन में, आते मां के नवराते।
मुंह मांगा वर उनको मिलता, जो दर पे चलके आते।

मनमोहन तुझे रिझाऊं तुझे नित नए लाड़ लड़ाऊं(Manmohan Tujhe Rijhaun Tujhe Neet Naye Laad Ladau)

मनमोहन तुझे रिझाऊं,
तुझे नित नए लाड़ लड़ाऊं,

राधा रानी की पूजा विधि

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

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