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मेरी ज़िन्दगी सवर जाए (Meri Zindagi Sanwar Jaye)

मेरी ज़िन्दगी सवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

तमन्ना फिर मचल जाये,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥


और जो कुछ है तोर,

तेरा तुझको सौंपता,

गुरुवर क्या लागे है मोर।

नब्जें जवाब दे चुकी,

सांस का कुछ पता नहीं,

आज का दिन तो कट गया,

कल की मुझे खबर नहीं।

तेरी कृपा से बेनियाज़,

कौन सी शय मिली नहीं,

झोली ही मेरी तंग है,

तेरे यहाँ कमी नहीं ॥


सर भी है पेशे नजर,

इसके आगे तो बता दे,

क्या है नजराना तेरा ॥


छलकते आँख के आंसू,

कही बेकार ना हो जाए,

कही बेकार ना हो जाए,

चरण छूकर बने मोती,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥


करम से बन गया पत्थर,

नहीं है रूप मेरा कोई,

नहीं है रूप मेरा कोई,

सलीके से संवर जाऊँ,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥


बिना तेरे ओ मनमोहन,

मैं मुरझा सा ही रहता हूँ,

मैं मुरझा सा ही रहता हूँ,

चमन मन के ये खिल जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥


नही मिलते हो तुम मुझसे,

तो मोह दुनिया से होता है,

तो मोह दुनिया से होता है,

कटे सारे ये भव बंधन,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥


भटकता रहता हूँ दर दर,

तेरे दीदार के खातिर,

तेरे दीदार के खातिर,

भटकना छुट जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥


मेरी ज़िन्दगी सवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

तमन्ना फिर मचल जाये,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥


माधो हम ऐसे, तू ऐसा - शब्द कीर्तन (Madho Hum Aise Tu Aisa)

हम पापी तुम पाप खंडन
नीको ठाकुर देसा

मेरी मैया तू एक बार आजा, दर्श दिखा जा(Meri Maiya Tu Ek Baar Aaja Darsh Dikha Jaa)

मेरी मैया तू एक बार आजा,
हाँ दर्श दिखा जा,

वो कौन है जिसने हम को दी पहचान है (Wo Kon Hai Jisne Humko Di Pahachan Hai)

वो कौन है जिसने,
हम को दी पहचान है,

माघ गुप्त नवरात्रि विशेष उपाय

साल 2025 की पहली गुप्त नवरात्रि 30 जनवरी से प्रारंभ हो रही है। माघ मास में पड़ने के कारण यह गुप्त नवरात्रि बेहद खास होती है। इस बार माघ मास में महाकुंभ भी है। ऐसे में इस गुप्त नवरात्रि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

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