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प्रभु हम पे कृपा करना, प्रभु हम पे दया करना (Prabhu Humpe Daya Karna)

प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

बैकुंठ तो यही है,

हृदय में रहा करना ॥


गूंजेगे राग बन कर,

वीणा की तार बनके,

प्रगटोगे नाथ मेरे,

ह्रदय में प्यार बनके ।

हर रागिनी की धुन पर,

स्वर बन कर उठा करना,

बैकुंठ तो यही है,

हृदय में रहा करना ॥


प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

बैकुंठ तो यही है,

हृदय में रहा करना ॥


नाचेंगे मोर बनकर,

हे श्याम तेरे द्वारे,

घनश्याम छाए रहना,

बनकर के मेघ कारे ।

बनकर के मेघ कारे ।

अमृत की धार बनकर,

प्यासों पे दया करना,

बैकुंठ तो यही है,

हृदय में रहा करना ॥


प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

बैकुंठ तो यही है,

हृदय में रहा करना ॥


तेरे वियोग में हम,

दिन रात हैं उदासी,

अपनी शरण में लेलो,

हे नाथ ब्रज के वासी ।

हे नाथ ब्रज के वासी ।

तुम सो हम शब्द बन कर,

प्राणों में रमा करना,

बैकुंठ तो यही है,

हृदय में रहा करना ॥


प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

बैकुंठ तो यही है,

हृदय में रहा करना ॥

मेरी अखियाँ तरस रही, भोले का दीदार पाने को(Meri Akhiyan Taras Rahi Bhole Ka Didar Pane Ko)

मेरी अखियाँ तरस रही,
भोले का दीदार पाने को,

रामचंद्र कह गये सिया से (Ramchandra Keh Gaye Siya Se)

रामचंद्र कह गये सिया से,
हे रामचंद्र कह गये सिया से,

श्री शिवमङ्गलाष्टकम्

भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने ।

देवी दुर्गा की 10 महाविद्या की साधना

हिंदू वैदिक पंचाग के अनुसार, 30 जनवरी 2025 से माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। हिंदू धर्म में हर साल 4 नवरात्रि मनाई जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, माघ माह की गुप्त नवरात्रि अंतिम नवरात्रि होती है।

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