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मेरी अखियाँ तरस रही, भोले का दीदार पाने को(Meri Akhiyan Taras Rahi Bhole Ka Didar Pane Ko)

मेरी अखियाँ तरस रही,

भोले का दीदार पाने को,

मैं भगत दीवाना तेरा,

दिखा दूंगा ज़माने को,

मेरी अँखियाँ तरस रही,

भोले का दीदार पाने को ॥


तेरी लगन में डूबा रहूँगा,

जब तक है सांसो में दम,

जितना चाहे ले ले इम्तेहा,

फिर भी आस ना होगी कम,

ये मन विचलित हो रहा भोले,

आ कुछ समझाने को,

मेरी अँखियाँ तरस रही,

भोले का दीदार पाने को ॥


कोई चढ़ाए सोना चांदी,

हीरे और मोती अनमोल,

मेरे पास प्रभु कुछ भी नहीं,

बस भक्ति लगन के मीठे बोल,

ये जीवन तुझपे अर्पण,

आ दया बरसाने को,

मेरी अँखियाँ तरस रही,

भोले का दीदार पाने को ॥


मेरी अखियाँ तरस रही,

भोले का दीदार पाने को,

मैं भगत दीवाना तेरा,

दिखा दूंगा ज़माने को,

मेरी अँखियाँ तरस रही,

भोले का दीदार पाने को ॥

महाशिवरात्रि के विशेष उपाय

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का पवित्र त्योहार आंतरिक शांति का प्रतीक है। इस दिन शिवभक्त उपवास, पूजा-अर्चना और रात्रि जागरण के माध्यम से भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

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बधैया बाजे आँगने में,
बधैया बाजे आँगने मे ॥

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि(Ki Ban Gaye Nandlal Lilihari)

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,
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मुखड़ा देख ले प्राणी,
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