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यदि नाथ का नाम दयानिधि है (Yadi Nath Ka Naam Dayanidhi Hai)

यदि नाथ का नाम दयानिधि है,

तो दया भी करेंगे कभी ना कभी,

दुखहारी हरी, दुखिया जन के,

दुख क्लेश हरेगें कभी ना कभी ॥


जिस अंग की शोभा सुहावनी है,

जिस श्यामल रंग में मोहनी है,

उस रूप सुधा से स्नेहियों के,

दृग प्याले भरेगें कभी ना कभी ॥


जहां गिद्ध निषाद का आदर है,

जहाँ व्याध अजामिल का घर है,

वही भेष बनाके उसी घर में,

हम जा ठहरेगें कभी ना कभी ॥


करुणानिधि नाम सुनाया जिन्हें,

कर्णामृत पान कराया जिन्हें,

सरकार अदालत में ये गवाह,

सभी गुजरेगें कभी ना कभी ॥


हम द्वार में आपके आके पड़े,

मुद्दत से इसी है जिद पर अड़े,

भव-सिंधु तरे जो बड़े से बड़े,

तो ये ‘बिन्दु’ तरेगें कभी ना कभी ॥


यदि नाथ का नाम दयानिधि है,

तो दया भी करेंगे कभी ना कभी,

दुखहारी हरी, दुखिया जन के,

दुख क्लेश हरेगें कभी ना कभी ॥

मेरे श्याम धणी की मोरछड़ी(Mere Shyam Dhani Ki Morchadi)

मेरे श्याम धणी की मोरछड़ी,
पल भर में जादू कर जाएगी,

राम के रंग में रंगा हुआ है, अंजनीसुत बजरंग बाला (Ram Ke Rang Mein Ranga Hua Hai Anjani Sut Bajrangbala)

राम के रंग में रंगा हुआ है,
अंजनीसुत बजरंग बाला,

महाशिवरात्रि पूजा विधि

महाशिवरात्रि पर ही मां पार्वती व भगवान शिव विवाह के बंधन में बंधे थे। महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव व माता पार्वती को समर्पित है।

सियारानी का अचल सुहाग रहे - भजन (Bhajan: Siyarani Ka Achal Suhag Rahe)

मेरे मिथिला देश में, आओ दूल्हा भेष ।
ताते यही उपासना, चाहिए हमें हमेशा ॥

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