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वाक् देवी हे कलामयी हे सुबुद्धि सुकामिनी (Vak Devi He Kalamayee He Buddhi Sukamini)

वाक् देवी हे कलामयी

हे सुबुद्धि सुकामिनी

ज्ञान रूपे सुधि अनूपे

हे सरस्वती नामिनी !

वाक् देवी हे कलामयी

हे सुबुद्धि सुकामिनी

बसू अधर'मे भाव'घर'मे शुद्ध ह्रदय सँवारि दे

ज्ञान गंगा भरि दिय'

माँ विद्या भरि भरि शारदे

करू इजोरे सभ डगरि मे

घेरि रहलै जामिनी !


वाक् देवी हे कलामयी

हे सुबुद्धि सुकामिनी


पाणि वीणा पाणि पुस्तक

हंस वाहिनी वागीशे

राग लय सुर निर्झरी बहबू

हे माँ हमरो दिशे

माय देखियौ द्वंद्व एहिमन

करू शमन हरि-वामिनी !


वाक् देवी हे कलामयी

हे सुबुद्धि सुकामिनी


छल प्रपञ्चसँ दूर रहि रहि

किछु करी जगले सदा

जे देलौं माँ ज्ञान सुधि बुधि

बाँटि दी ओ सर्वदा

फूटय नै शिव के अधर सँ

दोख कुबुद्धि के दामिनी !


वाक् देवी हे कलामयी

हे सुबुद्धि सुकामिनी

भूतनाथ अष्टकम्

शिव शिव शक्तिनाथं संहारं शं स्वरूपम्
नव नव नित्यनृत्यं ताण्डवं तं तन्नादम्

प्रदोष व्रत के खास उपाय क्या हैं?

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जो हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। जो शिव भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

करें भगत हो आरती माई दोई बिरियां

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सदा भवानी दाहनी, सम्मुख रहें गणेश।
पांच देव रक्षा करें,
ब्रह्मा, विष्णु, महेश।

श्री बृहस्पतिवार/गुरुवार की व्रत कथा (Shri Brispatvaar /Guruvaar Ki Vrat Katha

भारतवर्ष में एक राजा राज्य करता था वह बड़ा प्रतापी और दानी था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों की सहायता करता था।