माघ पूर्णिमा विशेष ज्योतिष उपाय

Magh Purnima Upay: माघ पूर्णिमा के दिन जरूर करें ये विशेष ज्योतिष उपाय, जीवन में नहीं रहेगी धन की कमी


माघ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में खास है। इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा की जाती हैं। इस दिन लोग व्रत करते हैं और सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करते हैं। इसके साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए, इस आर्टिकल में  आपको इस लेख में माघ पूर्णिमा के उन उपायों के बारे में बताते हैं, जिससे जीवन में धन की कमी नहीं होगी। 


कब है माघ पूर्णिमा?  


वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह की पूर्णिमा तिथि 11 फरवरी की शाम 6:55 बजे शुरू होगी और 12 फरवरी की शाम 7:22 बजे इस इस तिथि का समापन होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, माघ पूर्णिमा 12 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी।


जानिए माघ पूर्णिमा के विशेष उपाय


  1. लक्ष्मी जी की पूजा:- मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा गया है। ऐसे में माघ पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाज मां लक्ष्मी को प्रतिमा को गंगाजल में स्नान कराना चाहिए। फिर लक्ष्मी जी को कमल का फूल और नारियल अर्पित करें। इसके बाद महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से आर्थिक तंगी दूर हो सकती है।
  2. तिजोरी में रखें यह चीज:- माघ पूर्णिमा के दिन श्रीहरि और लक्ष्मी जी की पूजा करने के बाद 11 पीले रंग की कौड़ियों को पीले या लाल कपड़े में लपेटकर रखें। इसके बाद कुछ देर के लिए इन कौड़ियों को मां लक्ष्मी के पास रख दें और फिर इन्हें उठाकर अपनी घर की तिजोरी में रख दें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से घर में धन की वर्षा होनी शुरू हो जाएगी। 
  3. पीपल में जल अर्पित करें:- पीपल के पेड़ को विशेष महत्व दिया जाता है। कहा जाता है इसमें त्रिदेव का वास होता है। ऐसे में माघ पूर्णिमा के दिन जल में दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर अर्पित करना चाहिए। इसके बाद शाम को पीपल के नीचे घी का दीया जलाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस उपाय को करने से व्यक्ति को त्रिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

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किसे नहीं देखना चाहिए होलिका दहन

होली का त्योहार जितना रंगों और उमंग से भरा होता है, उतनी ही महत्वपूर्ण इससे जुड़ी धार्मिक परंपराएं भी हैं। होलिका दहन एक पौराणिक परंपरा है, जो बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है।

होलिका दहन की राख शुभ है या अशुभ?

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्ति की शक्ति को दर्शाता है। कुछ जगह मान्यता है कि होलिका में राक्षस हिरण्यकश्युप की बहन होलिका जल गईं थीं इसलिए ये अशुभता का प्रतीक है।

ऐ री मैं तो प्रेम दिवानी (Ae Ri Main To Prem Diwani)

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।

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