जल देवता की पूजा कैसे करें?

इस विधि से करें जल देवता की पूजा, जीवन में कभी नहीं होगी जल संबंधित समस्या


हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं के एक विशेष स्थान और महत्व है। सभी देवी-देवताओं की पूजा भी विशेष रूप से करने का विधान हैं। वहीं देवी-देवताओं के साथ-साथ पंचतत्व की पूजा-अर्चना भी विशेष रूप की जाती है। पंचतत्व में जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी और आकाश शामिल हैं। जिसमें से एक जल का भी विशेष स्थान है। आपको बता दें, भगवान विष्णु को जल के देवता के रूप में भी पूजा जाते हैं। उन्हें जलधि के नायक के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि वे सागर में निवास करते हैं और जल को जीवनदायिनी मानते हैं। समुद्र को विष्णु का निवास स्थल माना जाता है। विष्णु के अधीन जल का संरक्षण, जीवन का पालन और विनाश कार्य होते हैं। अब ऐसे में अगर आप जल देवता की पूजा-अर्चना कर रहे हैं, तो किस विधि से करना शुभ माना जाता है और पूजा सामग्री के साथ-साथ पूजा का महत्व क्या है। इसके बारे में विस्तार से इस लेख में जानते हैं। 


जल देवता की पूजा के लिए सामग्री 


जल देवता की पूजा आप किसी साफ नदी के तट पर बैठकर कर सकते हैं। 


  • कलश 
  • सफेद फूल
  • घी का दीपक
  • चन्दन 
  • फल
  • दूध 
  • शक्कर
  • तुलसी के पत्ते
  • गंगाजल 
  • कुंकुम और हल्दी 


जल देवता की पूजा किस विधि से करें? 


  • सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल से शुद्ध करें।
  • एक मिट्टी या धातु का कलश लें। इसे गंगाजल से भरें और उसमें कुछ पवित्र चीजें जैसे कि रोली, चावल, कुछ सिक्के डालें।
  • कलश के सामने बैठकर वरुण देव का मंत्र जाप करें।
  • ऊं अपां पतये वरुणाय नमः
  • ऊं वरुणाय नमः
  • कलश को फूल, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं। 
  • जल देवता की आरती करें। 
  • आरती करने के बाद एक स्थान पर खड़े होकर जल देवता के नाम से 21 बार परिक्रमा लगाएं। 
  • आप जल देवता के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा भी विशेष रूप से करें। तभी पूजा सफल मानी जाती है। 


जल देवता की पूजा के नियम क्या हैं? 


  • जल देवता की पूजा करने के लिए सही और साफ स्थान ही चुनें। 
  • जल देवता की पूजा के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा जरूर करें। 
  • जल देवता की पूजा सुबह के समय करना शुभ माना जाता है। 
  • जल देवता की पूजा में गुड़ से बने चीजों का भोग लगाएं। 
  • जल देवता की पूजा करने के दौरान मंत्रों का उच्चारण सही ढंग से करें। 
  • जल देवता की पूजा करने के बाद दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। 


जल देवता की पूजा का महत्व क्या है? 


जल देवता की पूजा करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही अगर आपको बार-बार जल से संबंधित कोई परेशानी झेलनी पड़ रही है, तो उससे मुक्ति मिल सकती है। साथ ही व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सौभाग्य में भी वृद्धि हो सकती है। जल देवता की पूजा करने के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से करें। विष्णु जी की पूजा अवश्य करें। इनकी पूजा के बिना जल देवता की पूजा अधूरी मानी जाती है। 


........................................................................................................
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए (Mujhe Tera Sahara Sada Chahiye)

आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए ॥

शिव का नाम लो (Shiv Ka Naam Lo)

शिव का नाम लो ।
हर संकट में ॐ नमो शिवाय,

कैसी यह देर लगाई दुर्गे... (Kaisi Yeh Der Lagayi Durge)

कैसी यह देर लगाई दुर्गे, हे मात मेरी हे मात मेरी।
भव सागर में घिरा पड़ा हूँ, काम आदि गृह में घिरा पड़ा हूँ।

माघ माह के जरूरी उपाय

अपने इष्ट देवता की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। हर व्यक्ति का कोई न कोई इष्ट देव होता है। कोई भगवान विष्णु को मानता है, तो कोई भगवान शिव को।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।