बिहारी ब्रज में घर मेरा बसा दोगे तो क्या होगा (Bihari Braj Mein Ghar Mera Basa Doge To Kya Hoga)

बिहारी ब्रज में घर मेरा बसा दोगे तो क्या होगा,

बसा दोगे तो क्या होगा, बसा दोगे तो क्या होगा,

कृपा करके जो वृंदावन बुला लोगे तो क्या होगा,

बिहारी ब्रज में घर मेरा बसा दोगे तो क्या होगा ॥


कभी तुम सामने आते कभी फिर दूर हो जाते, कभी फिर दूर हो जाते,

हमारे बीच का परदा हटा दोगे तो क्या होगा,

बिहारी ब्रज में घर मेरा बसा दोगे तो क्या होगा ॥


तेरा दीदार पाने को तरसती है मेरी नज़रे तरसती है मेरी नज़रे,

अगर दासी को चरनो से लगा लोगे तो क्या होगा,

बिहारी ब्रज में घर मेरा बसा दोगे तो क्या होगा ॥


बसा दोगे तो क्या होगा, बसा दोगे तो क्या होगा,

कृपा करके जो वृंदावन बुला लोगे तो क्या होगा॥


कृपा करके जो वृंदावन बुला लोगे तो क्या होगा,

बिहारी ब्रज मेी घर मेरा बसा दोगे तो क्या होगा ॥

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हे गणपति गजानन, मेरे द्वार तुम पधारो (Hey Ganpati Gajanan Mere Dwar Tum Padharo)

हे गणपति गजानन,
मेरे द्वार तुम पधारो,

मैं हार गया जग से, अब तुमको पुकारा है (Main Haar Gaya Jag Se Ab Tumko Pukara Hai)

मैं हार गया जग से,
अब तुमको पुकारा है,

लोरी सुनाए गौरा मैया(Lori Sunaye Gaura Maiya)

लोरी सुनाए गौरा मैया,
झूला झूले गजानंद,

कब है रुक्मिणी अष्टमी?

हिंदू धर्म में पौष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी को समर्पित है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी पर ही द्वापर युग में विदर्भ के महाराज भीष्मक के यहां देवी रुक्मिणी जन्मी थीं।

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