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आओ विनायक म्हारे, आंगणिये पधारो (Aao Vinayak Mhare Aanganiye Padharo)

आओ विनायक म्हारे,

आंगणिये पधारो,

भक्ता रा कारज सारो जी,

हाँ संवारो जी,

आओं विनायक म्हारे,

आंगणिये पधारो ॥


मूषक रा असवार देवा,

पहला थारो ध्यान धरा,

कीर्तन मांड्यो आंगणे,

बाबा थारो अह्वान करा,

रिद्धि सिद्धि के सागे,

आओ जी,

म्हारे आंगणिये पधारो,

आओं विनायक म्हारे,

आंगणिये पधारो ॥


घृत सिंदूर चढ़ावा थारे,

लड्डुवन भोग लगावा जी,

चन्दन चौक पुरावा ऊँचे,

आसन पे बिठावा जी,

रणत भवन सुथे आवो जी,

म्हारे आंगणिये पधारो,

आओं विनायक म्हारे,

आंगणिये पधारो ॥


पहली पत्रिका भेजी थाने,

बेगा सा थे आओ जी,

आप भी आओ सब देवा ने,

सागे अपने ल्याओ जी,

भगता रा मान बढ़ाओ जी,

म्हारे आंगणिये पधारो,

आओं विनायक म्हारे,

आंगणिये पधारो ॥


आओ विनायक म्हारे,

आंगणिये पधारो,

भक्ता रा कारज सारो जी,

हाँ संवारो जी,

आओं विनायक म्हारे,

आंगणिये पधारो ॥

माँ दिल के इतने करीब है तू(Maa Dil Ke Itne Kareeb Hai Tu)

माँ दिल के इतने करीब है तू,
जिधर भी देखूं नज़र तू आए,

अप्रैल 2025 में मासिक कार्तिगाई कब है

मासिक कार्तिगाई का हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस पर्व पर भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है। यह कार्तिगाई या कृत्तिका नक्षत्र में पड़ता है।

कहियो दर्शन दीन्हे हो, भीलनियों के राम (Kahiyo Darshan Dinhe Ho Bhilaniyo Ke Ram)

पंथ निहारत, डगर बहारथ,
होता सुबह से शाम,

अन्वाधान व इष्टि क्या है

सनातन हिंदू धर्म में, अन्वाधान व इष्टि दो प्रमुख अनुष्ठान हैं। जिसमें भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया करते हैं। इसमें प्रार्थना व पूजा कुछ समय के लिए यानी छोटी अवधि के लिए ही की जाती है।

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