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बालाजी के भक्तों सुनलो, बाबा का गुण गाया करो (Balaji Ke Bhakto Sun Lo Baba Ka Gun Gaya Karo)

बालाजी के भक्तों सुनलो,

बाबा का गुण गाया करो,

श्रद्धा और विश्वास प्रेम से,

उनकी ज्योत जगाया करो ॥


पवन देव के लाल और माँ,

अंजनी सुत का ध्यान धरो,

दुःख और कष्ट सताए जब जब,

याद उन्हें बस किया करो,

सुन्दरकाण्ड का वर्णन उनकी,

महिमा रोज सुनाया करो,

श्रद्धा और विश्वास प्रेम से,

उनकी ज्योत जगाया करो ॥


दिन मंगल का जब भी आए,

बाबा का उपवास करो,

लाल लंगोटा सिंदूर चढ़ाकर,

चालीसा का पाठ करो,

देसी घी के साथ चूरमा,

उनको भोग लगाया करो,

श्रद्धा और विश्वास प्रेम से,

उनकी ज्योत जगाया करो ॥


चरण पकड़ लिए हनुमत के जब,

राम जी कैसे भागेंगे,

राम की जब अनुकम्पा होगी,

सोए भाग्य भी जागेंगे,

स्वामी सेवक के रिश्ते का,

कुछ तो लाभ उठाया करो,

श्रद्धा और विश्वास प्रेम से,

उनकी ज्योत जगाया करो ॥


बड़े दयालु बाला मेरे,

लोग ये सारे कहते है,

भरे हुए भंडारों से वो,

झोलियाँ भरते रहते है,

जीवन मोड़ लिखे तो ‘बबली’,

बड़े प्रेम से गाया करो,

श्रद्धा और विश्वास प्रेम से,

उनकी ज्योत जगाया करो ॥


बालाजी के भक्तों सुनलो,

बाबा का गुण गाया करो,

श्रद्धा और विश्वास प्रेम से,

उनकी ज्योत जगाया करो ॥

बाबा महाकाल तेरा, सारा जग दीवाना है (Baba Mahakal Tera, Sara Jag Deewana Hai)

बाबा महाकाल तेरा,
सारा जग दीवाना है,

राम धुन लागि (Ram Dhun Lagi)

राम धुन लागि श्री राम धुन लागि,
मन हमारा हुआ,

सूर्यदेव को रथ सप्तमी पर क्या चढ़ाएं

रथ-सप्तमी के दिन सूर्यदेव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अगर सूर्यदेव की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ किया जाए तो व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य के साथ मान-सम्मान में भी वृद्धि हो सकती है।

होली और रंगों का अनोखा रिश्ता

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ये खुशियां, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और गिले-शिकवे भुलाकर त्योहार मनाते हैं। लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा है कि होली पर रंग लगाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है, जो भगवान श्रीकृष्ण और प्रह्लाद से जुड़ी है।

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