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मै चाहूं सदा दर तेरे आना (Main Chahu Sada Dar Tere Aana)

मैं चाहूँ सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

तेरा दर ही तो सबका ठिकाना,

तेरा दर ही तो सबका ठिकाना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

मै चाहूं सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए ॥


तेरी चोखट शीश झुकाना,

आस है तेरा दर्शन पाना,

कभी तू भी मेरे घर आना जाना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

मै चाहूं सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए ॥


करता रहूँ मैं सुमिरण तेरा,

कोई नहीं इस जग में मेरा,

कट जाए चौरासी वाला फेरा,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

मै चाहूं सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए ॥


तेरे चरणों में रम जाऊं,

और कहीं अब क्यों मैं जाऊं,

मैं तो बन गया तेरा माँ दीवाना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

मै चाहूं सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए ॥


‘शान’ पे नजरे तेरी निगाहें,

‘जीत’ की मैया थामो बाहें,

अपने ‘योगी’ को चरणों से लगाना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

मै चाहूं सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए ॥


मैं चाहूँ सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

तेरा दर ही तो सबका ठिकाना,

तेरा दर ही तो सबका ठिकाना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए,

मै चाहूं सदा दर तेरे आना,

तू यूँ ही बुलाना दातिए ॥

श्रावण शुक्ल की पुत्रदा एकादशी (Shraavan Shukl Kee Putrada Ekaadashee)

युधिष्ठिर ने कहा-हे केशव ! श्रावण मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का क्या नाम और क्या माहात्म्य है कृपया आर कहिये श्री कृष्णचन्द्र जी ने कहा-हे राजन् ! ध्यान पूर्वक इसकी भी कथा सुनो।

आमलकी एकादशी कब मनाई जाएगी

पंचांग के अनुसार, हर महीने में दो एकादशी पड़ती हैं और साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं। इन सभी एकादशी तिथियों का विशेष महत्व होता है।

Shri Saraswati Chalisa (श्री सरस्वती चालीसा)

जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥

माघ पूर्णिमा पूजा विधि

हिंदू धर्म में, पूर्णिमा तिथि को विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन जल और प्रकृति में एक अद्भुत ऊर्जा प्रवाहित होती है, जो मानव जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इस वर्ष माघ पूर्णिमा 2025 और भी विशेष बन गई है।

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