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रख लाज मेरी गणपति(Rakh Laaj Meri Ganpati)

रख लाज मेरी गणपति,

अपनी शरण में लीजिए ।

कर आज मंगल गणपति,

अपनी कृपा अब कीजिए ॥


रख लाज मेरी गणपति

रख लाज मेरी गणपति

सिद्धि विनायक दुःख हरण,

संताप हारी सुख करण ।


करूँ प्रार्थना मैं नित्त प्रति,

वरदान मंगल दीजिए ॥


रख लाज मेरी गणपति,

अपनी शरण में लीजिए।

कर आज मंगल गणपति,

अपनी कृपा अब कीजिए ॥

रख लाज मेरी गणपति


तेरी दया, तेरी कृपा,

हे नाथ हम मांगे सदा ।

तेरे ध्यान में खोवे मति,

प्रणाम मम अब लीजिए ॥


रख लाज मेरी गणपति,

अपनी शरण में लीजिए ।

कर आज मंगल गणपति,

अपनी कृपा अब कीजिए ॥

रख लाज मेरी गणपति


करते प्रथम तव वंदना,

तेरा नाम है दुःख भंजना ।

करना प्रभु मेरी शुभ गति,

अब तो शरण मे लीजिए ॥


रख लाज मेरी गणपति,

अपनी शरण में लीजिए।

कर आज मंगल गणपति,

अपनी कृपा अब कीजिए ॥


रख लाज मेरी गणपति

रख लाज मेरी गणपति

श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् (Sri Devi Atharvashirsha)

देव्यथर्वशीर्षम् जिसे देवी अथर्वशीर्ष के नाम से भी जाना जाता है, चण्डी पाठ से पहले पाठ किए जाने वाले छह महत्वपूर्ण स्तोत्र का हिस्सा है।

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देना हो तो दीजिए,
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भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे (Bhor Bhee Din Chadh Gaya Meri Ambe)

भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे
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