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शिव का डमरू डम डम बाजे (Shiv Ka Damru Dam Dam Baje)

शिव का डमरू डम डम बाजे,

टोली कावड़ियों की नाचे,

कावड़ियों की नाचे,

टोली कावड़ियों की नाचे,

शिव का डमरू डम डम बाजें,

टोली कावड़ियों की नाचे ॥


कोई पहने पीले वस्त्र,

कोई पहने लाल,

दाढ़ी मूछें बड़ी हुई हैं,

रूखे सूखे बाल,

शिव भोले को चले मनाने,

नंगे पैरों भागे,

शिव का डमरू डम डम बाजें,

टोली कावड़ियों की नाचे ॥


आंधी आवे पानी आवे,

चाहे दुपहरिया भारी,

जंगल हो या पहाड़ के रस्ते,

पांव न धरे पिछाड़ी,

कावड़ लेने चले है सारे,

लोग लुगाई बच्चे,

शिव का डमरू डम डम बाजें,

टोली कावड़ियों की नाचे ॥


भोले जी के धाम चले है,

एक दूसरे के संग में,

हरिद्वार से लेकर कावड़,

रंग गए शिव के रंग में,

सावन की रुत आई सुहानी,

गाए कोई नाचे,

शिव का डमरू डम डम बाजें,

टोली कावड़ियों की नाचे ॥


गंगाजल शंकर को चढ़ा कर,

भगत मगन हुए सारे,

हाथ जोड़ कर खड़े कावरिया,

शिव भोले के द्वारे,

‘आनन्द’ गाए शिव के भजन,

कावरिये मिलकर नाचे,

शिव का डमरू डम डम बाजें,

टोली कावड़ियों की नाचे ॥


शिव का डमरू डम डम बाजे,

टोली कावड़ियों की नाचे,

कावड़ियों की नाचे,

टोली कावड़ियों की नाचे,

शिव का डमरू डम डम बाजें,

टोली कावड़ियों की नाचे।।

श्रीकृष्ण लीला: जब बाल कान्हा ने फल वाली अम्मा की झोली हीरे-मोती से भर दी

भगवान अपने भक्तों को कब, कहा, क्या और कितना दे दें यह कोई नहीं जानता। लेकिन भगवान को अपने सभी भक्तों का सदैव ध्यान रहता है। वे कभी भी उन्हें नहीं भूलते। भगवान उनके भले के लिए और कल्याण के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

ओ मैया मैं तुम्हारा, लगता नहीं कोई (O Maiya Main Tumhara Lagta Nahi Koi)

ओ मैया मैं तुम्हारा,
लगता नहीं कोई,

क्यों मनाते हैं रथ सप्तमी

रथ सप्तमी सनातन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में यह त्योहार 4 फरवरी को मनाई जाएगी।

गौरी के लाड़ले (Gauri Ke Ladle)

गौरी के लाड़ले,
महिमा तेरी महान,