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Tune Mujhe Bulaya Sherawaliye (तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये)

साँची ज्योतो वाली माता, तेरी जय जय कार ।

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये ।
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये । 

ज्योता वालिये, पहाड़ा वालिये, मेहरा वालिये ॥ 

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये । 
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये । 

सारा जग है इक बंजारा, सारा जग है इक बंजारा, सब की मंजिल तेरा द्वारा । 
ऊँचे परबत लम्बा रास्ता, ऊँचे परबत लम्बा रास्ता, पर मैं रह ना पाया, शेरा वालिये ॥ 

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये ॥ सूने मन में जल गयी बाती, तेरे पथ में मिल गए साथी । 
मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू, मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू, बिन मांगे सब पाया, शेरा वालिये ॥ 

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये ॥ कौन है राजा, कौन भिखारी, एक बराबर तेरे सारे पुजारी । 
तुने सब को दर्शन देके, तुने सब को दर्शन देके, अपने गले लगाया, शेरा वालिये ॥ 

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये । 
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये । 

प्रेम से बोलो, जय माता दी ॥ 
सारे बोलो, जय माता दी ॥ 

आते बोलो, जय माता दी ॥ 
जाते बोलो, जय माता दी ॥ 

कष्ट निवारे, जय माता दी ॥ 
पार निकले, जय माता दी ॥ 

देवी माँ भोली, जय माता दी ॥ 
भर दे झोली, जय माता दी ॥ 

वादे के दर्शन, जय माता दी ॥ 
जय माता दी, जय माता दी ॥
जय हो बाबा विश्वनाथ (Jay Ho Baba Vishwanath)

जय हो बाबा विश्वनाथ,
जय हो भोले शंकर,

नमो नमो शंकरा(Namo Namo Shankara)

जय हो, जय हो शंकरा
भोलेनाथ, शंकरा

चन्द्रघंटा माँ से अर्जी मेरी (Chandraghanta Maa Se Arji Meri)

चन्द्रघंटा माँ से अर्जी मेरी,
मैं दास बनूँ तेरा,

वैकुंठ चतुर्दशी का महत्व

वैकुंठ चतुर्दशी हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इसे कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। यह कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले आता है और देव दिवाली से भी संबंधित है।

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