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राम को देख कर के जनक नंदिनी, बाग में वो खड़ी की खड़ी रह गयी ।
चटक मटक चटकीली चाल, और ये घुंघर वाला बाल,
कर दो दूर प्रभु, मेरे मन में अँधेरा है,
तेरी मुरली की मैं हूँ गुलाम, मेरे अलबेले श्याम अलबेले श्याम मेरे मतवाले श्याम ॥