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ऐसो रास रच्यो वृन्दावन (Aiso Ras Racho Vrindavan)

ऐसो रास रच्यो वृन्दावन,

है रही पायल की झंकार ॥

ऐसो रास रच्यो वृन्दावन,

है रही पायल की झंकार ॥

घुंघरू खूब छमा छ्म बाजे,

बजते बिछुवा बहुते बाजे,

रवा कौंधनी केहु बाजे,

अंग अंग में गहना साजे,

चूडियन की झंकार,

ऐसो रास रच्यो वृंदावन,

है रही पायल की झंकार ॥


बाजे भात भाँति के बाजे,

झांझ पखावज दुन्दुभि बाजे,

सारंगी और महुवर बाजे,

बंसी बाजे मधुर मधुर बाजे,

वीणा हूँ के तार,

ऐसो रास रच्यो वृंदावन,

है रही पायल की झंकार ॥


राधा मोहन दे गलबईयाँ,

नाचे संग संग ले फिरकईयाँ,

चाल चले शीतल सुखदईयाँ,

जामा पाटुका लहंगा फरिया,

करे सनन सरकार,

ऐसो रास रच्यो वृंदावन,

है रही पायल की झंकार ॥


ऐसो रास रच्यो वृन्दावन,

है रही पायल की झंकार ॥

कब है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व होता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। तब ये पर्व मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा।

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विधाता तू हमारा है,
तू ही विज्ञान दाता है ।

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वैष्णव जन तो तेने कहिये,
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