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बजरंग बाला बड़ा हो मतवाला (Bajrang Bala Bada Ho Matwala)

बजरंग बाला बड़ा हो मतवाला,

म्हे फेरा थारी माला,

लागो हो मनभावना,

आवो आवो नी,

बालाजी म्हारे आंगणा ॥


सालासर सु दास पधारो,

पूनरासर सु वीर जी,

मेहंदीपुर से घाटे वाला,

खेतोंलाव कपि धीर जी,

बेगा आओ संग में लावो,

सियाराम की जोड़ी,

धोक लगावा,

थारो पाट थरपावा,

चरणों में शीश नवावा,

लागो हो मनभावना,

आवो आवो नी,

बालाजी म्हारे आंगणा ॥


गंगाजल रो कलश भरियो है,

आप पियौ म्हारा बालाजी,

तेल थारे चमेली रो लायो,

आप लगाओ म्हारा बालाजी,

लाल लंगोटा हाथ में घोटा,

रूप बनाज्यो छोटा,

भगत गावे महिमा सुनावे,

चरणों में शीश झुकावे,

लागो हो मनभावना,

आवो आवो नी,

बालाजी म्हारे आंगणा ॥


खीर चूरमा रो भोग बनायो,

थे जिमो म्हारा बालाजी,

पानी नये कुए रो मंगायों,

आप पियो म्हारा बालाजी,

प्रेम पुजारी बाबे म्हारी,

किस्मत ने सवारी,

महिमा गांवा घणा सुख पावा,

चरणों में शीश नवावा,

लागो हो मनभावना,

आवो आवो नी,

बालाजी म्हारे आंगणा ॥


बजरंग बाला बड़ा हो मतवाला,

म्हे फेरा थारी माला,

लागो हो मनभावना,

आवो आवो नी,

बालाजी म्हारे आंगणा ॥

करूँ वंदन हे शिव नंदन (Karu Vandan Hey Shiv Nandan )

करूँ वंदन हे शिव नंदन,
तेरे चरणों की धूल है चन्दन,

भगवान कार्तिकेय की पूजा किस विधि से करें?

हिंदू धर्म में भगवान कार्तिकेय शिव-शक्ति के ज्येष्ठ पुत्र हैं। उन्हें युद्ध और बुद्धि का देवता कहा जाता है। इतना ही नहीं, भगवान कार्तिकेय को शक्ति और पराक्रम का स्वामी के रूप में भी जाना जाता है।

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले (Meri Rasna Se Prabhu Tera Naam Nikle)

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले,
हर घड़ी हर पल राम राम निकले ॥

अन्वाधान व इष्टि क्या है

सनातन हिंदू धर्म में, अन्वाधान व इष्टि दो प्रमुख अनुष्ठान हैं। जिसमें भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया करते हैं। इसमें प्रार्थना व पूजा कुछ समय के लिए यानी छोटी अवधि के लिए ही की जाती है।

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