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घर घर बधाई बाजे रे देखो (Ghar Ghar Badhai Baje Re Dekho)

घर घर बधाई बाजे रे देखो,

घर घर बधाई बाजे रे,

ढोलक नगाड़ा वाजे रे देखो,

ढोलक नगाड़ा वाजे रे

जन में अयोध्या में राम लला की,

माता कौशल्या खिलाये रे,

॥ घर घर बधाई बाजे रे देखो..॥

॥ जय श्री राम, जय श्री राम॥


सोने के पलना में झूले ललनवा,

चांदी की पहने पैजनियाँ,

झुन झुन बाजे पाओ में गुंगरु,

खुश है बड़ी सारी सखियाँ,

पीला पीताम्बर शोभा बडाये,

पहने कमर में कंधनियाँ,

॥ घर घर बधाई बाजे रे देखो..॥

॥ जय श्री राम, जय श्री राम॥


दसरथ के अंगना में ढोलक प्रभु जी,

भरत शत्रु लक्ष्मण जी,

माता सुमित्रा केकई कौशल्या,

गोदी खिलाये कभी चूमे जी,

संतो में महंतो को भोजन करवाए,

भर भर के दान लुटाये रे,

॥ घर घर बधाई बाजे रे देखो..॥

॥ जय श्री राम, जय श्री राम॥


विष्णु अवतारी राम जी हमार,

सबकी ही नैया तारे गे,

अब तो बचे ना पापी अधर्मी,

रावन को राम जी संहारे गये,

राम राम जो भोले की रीतू,

भव से ये पार उतारे गये,


घर घर बधाई बाजे रे देखो,

घर घर बधाई बाजे रे,

ढोलक नगाड़ा वाजे रे देखो,

ढोलक नगाड़ा वाजे रे


घर घर बधाई बाजे रे देखो,

घर घर बधाई बाजे रे,

ढोलक नगाड़ा वाजे रे देखो,

ढोलक नगाड़ा वाजे रे

सरस्वती नदी की पूजा कैसे करें?

सरस्वती नदी का उल्लेख विशेष रूप से ऋग्वेद, महाभारत, और विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में किया गया है। वेदों में इसे एक दिव्य नदी के रूप में पूजा गया है और यह ज्ञान, कला और संगीत की देवी सरस्वती से जुड़ी हुई मानी जाती है।

गजमुखं द्विभुजं देवा लम्बोदरं (Gajmukham Dvibhujam Deva Lambodaram)

गजमुखं द्विभुजं देवा लम्बोदरं,
भालचंद्रं देवा देव गौरीशुतं ॥

अन्नपूर्णा जयंती के दिन उपाय

सनातन धर्म में माता अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना गया है। इसलिए, हर साल मार्गशीर्ष माह में अन्नपूर्णा जयंती मनायी जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती धरती पर मां अन्नपूर्णा के रूप में अवतरित हुई थीं।

कृपा मिलेगी श्री राम जी की(Kirpa Milegi Shri Ramji Ki)

किरपा मिलेगी श्री राम जी की,
भक्ति करो, भक्ति करो,

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