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डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया(Dim Dim Damroo Bajavela Hamar Jogiya)

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया

हे हमार जोगिया हो हमार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया


शीश गंगा जी के धार सोहे चन्द्रमा लिल्लाहर

अंग भभूति रमावेला हामार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया


संग भुत बरियात और जोगनी जमात

भूढ़े बस हां चढ़ आवेला हामार जोगिया

अंग भभूति रमावेला हामार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया


पहिरे नागरी पुछाला हाथ कान पेहरि निहाला

हर दम राम नाम गावेल हामार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया


सब लोक के जो देवा करे सारा जग सेवा

के शिव शंकर खावे हामार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया

हे हमार जोगिया हो हमार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया


डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया

हे हमार जोगिया हो हमार जोगिया

डिम डिम डमरू बजावेला हामार जोगिया

श्री परशुराम चालीसा (Shri Parshuram Chalisa)

श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर धारि।
सुमरि गजानन शारदा, गहि आशिष त्रिपुरारि।।

श्री हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa)

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि।
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।

गुड़ी पड़वा क्यों मनाया जाता है

गुड़ी पड़वा मुख्य रूप से चैत्र माह में नवरात्रि की प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसी दिन से नववर्ष की शुरुआत भी होती है। इस साल गुड़ी पड़वा 30 मार्च, रविवार को मनाई जाएगी और इसी दिन चैत्र नवरात्रि भी शुरू होगी।

ललिता जयंती पर होती है राधा रानी की सबसे प्रिय सखी की पूजा, जानिए क्या है पौराणिक महत्व

हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण और राधा को प्रेम का प्रतीक माना गया है।

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