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हे शिव भोले भंडारी(Hey Shiv Bhole Bhandari)

हे शिव भोले भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी,

हे शिव भोलें भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी ॥


बाघम्बर तेरे अंग पर सोहे,

हाथ में तिरशूल भारी,

भूत पिशाच नृत्य करे संग में,

नाचे दे दे ताली,

हे शिव भोलें भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी ॥


डम डम डमरू बजाए,

नंदी की सवारी,

विष को पीकर क्षण में शिव ने,

देवो की विपदा टारि,

हे शिव भोलें भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी ॥


उमा रमण शम्भू त्रिपुरारी,

भव भय भंजनहारी,

इस विरले दानी की महिमा,

गावे सब नर नारी,

हे शिव भोलें भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी ॥


‘दामोदर’ की विनती यही है,

काटो विपदा हमारी,

कष्ट मिटा जग के तुम कर दो,

घर घर में खुशयारी,

हे शिव भोलें भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी ॥


हे शिव भोले भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी,

हे शिव भोलें भंडारी,

मैं आया शरण तिहारी ॥

मै हूँ बेटी तू है माता: भजन (Main Hoon Beti Tu Hai Mata)

मै हूँ बेटी तू है माता,
ये है जनम-जनम का नाता ।

कालाष्टमी की मंत्र जाप

कालाष्टमी पर्व भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की शक्ति और महिमा का प्रतीक है। जब भगवान शिव के क्रोध से काल भैरव का जन्म होता है। काल भैरव समय के भी स्वामी हैं।

16 सोमवार व्रत कथा (16 Somavaar Vrat Katha)

एक समय श्री महादेवजी पार्वती के साथ भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में अमरावती नगरी में आए। वहां के राजा ने शिव मंदिर बनवाया था, जो कि अत्यंत भव्य एवं रमणीक तथा मन को शांति पहुंचाने वाला था। भ्रमण करते सम शिव-पार्वती भी वहां ठहर गए।

रिद्धि सिद्धि का देव(Riddhi Siddhi Ka Dev Nirala)

रिद्धि सिद्धि का देव निराला,
शिव पार्वती का लाला,

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