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कितना सोणा है दरबार, भवानी तेरा (Kitna Sona Hai Darbar Bhawani Tera)

कितना सोणा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

तेरा ये दरबार भवानी,

तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥


कोई लाया लाल चुनरिया,

कोई लाया पैजनियां,

कोई बिंदिया कंगन लाया,

कोई मोतियन हार,

कितना प्यारा है,

कितना प्यारा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥


सिंह सवारी माँ जगदम्बे,

तेरी शोभा अति प्यारी,

बलिहारी हुआ आज भक्त वो,

किया जिसने दीदार,

कितना प्यारा है,

कितना प्यारा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥


जगराते में भजन भाव की,

पावन गंगा बहती है,

करे प्रार्थना ‘चोखानी’ भी,

लगाके जै जैकार,

कितना प्यारा है,

कितना प्यारा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥


कितना सोणा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

तेरा ये दरबार भवानी,

तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥

शिवजी को काल भैरव क्यों कहते हैं

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में क्षिप्रा नदी के तट पर भगवान शिव महाकाल के रूप में विराजमान हैं। बारह ज्योतिर्लिंगों में यह तीसरे स्थान पर आता है। उज्जैन में स्थित यह ज्योतिर्लिंग देश का एकमात्र शिवलिंग है जो दक्षिणमुखी है। मंदिर से कई प्राचीन परंपराएं जुड़ी हुई हैं।

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कान छेदने के मुहूर्त

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