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रण में आयी देखो काली(Ran mein aayi dekho Kali)

रण में आयी देखो काली,

खून से भरने खप्पर खाली,

दुष्टो को तू मारने वाली,

जय काली काली ॥


अष्ट भुजाओं वाला लहंगा,

पहन के मैया आई है,

काट के दुष्टो का सर मैया,

ने माला बनाई है,

चंडी रूप बात निराली,

सजती है मेरी मैया काली,

दुष्टो को तू मारने वाली,

जय काली काली ॥


देख के रूप विराट माँ तेरा,

कई देवता भी हारे,

तेरे आगे विनती करते,

हाथ जोड़ते है सारे,

आखिर में शिव शंकर जी ने,

किया है शांत तुझे माँ काली,

दुष्टो को तू मारने वाली,

जय काली काली ॥


जैसे भैरव बाबा की,

मुक्ति की तूने अम्बे माँ,

महिषासुर को सबक सिखाने,

वाली तू जगदम्बे माँ,

ऐसे ही ‘आशीष बागड़ी’,

चरणों में तेरे आया माँ,

‘हेमंत ब्रजवासी’ ने मैया,

तेरा ही गुण गाया माँ,

खुशियों सबको देने वाली,

जय काली काली ॥


रण में आयी देखो काली,

खून से भरने खप्पर खाली,

दुष्टो को तू मारने वाली,

जय काली काली ॥

नंदभवन में उड़ रही धूल(Nand Bhavan Me Ud Rahi Dhul)

नंदभवन में उड़ रही धूल,
धूल मोहे प्यारी लगे ॥

ब्रह्मानंदम परम सुखदम (Brahamanandam, Paramsukhdam)

ब्रह्मानंदम परम सुखदम,
केवलम् ज्ञानमूर्तीम्,

ललिता चालीसा का पाठ

ललिता जयंती का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। ललिता माता आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी जगत जननी हैं। मान्यता है कि देवी के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

गुप्त नवरात्रि 12 राशियों पर प्रभाव

साल में आने वाली चारों नवरात्रि का सनातन धर्म के लोगों के लिए खास महत्व है। 30 जनवरी से माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। जिसका समापन अगले महीने 7 फरवरी 2025 को होगा।

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